The Rig Veda (ऋग्वेद) is the oldest of the four Vedas and one of the most ancient religious texts in the world. Composed in Vedic Sanskrit by the Rishis (sages) of ancient India, it is a collection of 1,028 hymns (Suktas) organized into 10 books called Mandalas. These hymns are addressed to various deities — Agni (fire), Indra (king of gods), Soma (sacred plant), Varuna (cosmic order), Surya (sun), and many others.

Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం
stroms  Srimad Bhagavad Gita  Valmiki Ramayanam/Valmiki Ramayanam

Rig Veda - ऋग्वेद


Mandalas 1 - (2006 verses)


Mandala 1 · Verse 1
ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृतविजम् । होतां रत्नधातमम् ॥ (१)

I praise Agni, the high priest of sacrifice, the divine priest, the bestower of treasures.

मैं अग्नि की स्तुति करता हूं. वे यज्ञ के पुरोहित, दानादि गुणों से युक्त, यज्ञ में देवों को बुलाने वाले एवं यज्ञ के फल रूपी रत्नों को धारण करने वाले हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अग्निः पूर्वेभृषिभिरीड्यो नूतनैरुत. स देवाँ एह वक्षति.. (२)

Agni, praised by ancient sages and by the new, carries the gods here.

प्राचीन ऋषियों ने अग्नि की स्तुति की थी. वर्तमान ऋषि भी उनकी स्तुति करते हैं. वे अग्नि इस यज्ञ में देवों को बुलावें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अग्निना रयिमश्ववत् पोषमेव दिवेदिदिवे. यशसं वीरवत्तमम्.. (३)

May the divine fire grant us wealth, strength, and ever-increasing prosperity, bestowing glory and heroic progeny.

अग्नि की कृपा से यजमान को धन मिलता है. उन्हीं की कृपा से वह धन दिनदिन बढ़ता है. उस धन से यजमान यश प्राप्त करता है एवं अनेक वीर पुरुषों को अपने यहां रखता है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अग्ने यं यजमेश्वरं विश्वतः: परिभूरसि. स इहवेषु गच्छति.. (४)

O Agni, the Lord of sacrifice whom you encompass from all sides, may He come here to our offerings.

हे अग्नि! जिस यज्ञ की तुम चारों ओर से रक्षा करते हो, उस में राक्षस आदि हिंसा नहीं कर सकते. वही यज्ञ देवताओं को तृप्ति देने स्वर्ग जाता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अग्निहोता कविऋतु: सत्यश्रिश्नवस्तम:. देवो देवेभिरा गमतृ.. (५)

The fire-offering priest, the poet of seasons, the truthful and the swift, may the divine one come with the gods.

हे अग्नि देव! तुम दूसरे देवों के साथ इस यज्ञ में आओ. तुम यज्ञ के होता, बुद्धिसंपन्न, सत्यशील एवं परमकीर्ति वाले हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
यदङ्ग दाशुषे त्वमग्ने भद्रं करिष्यसि. तवेतत् सत्यमङ्घिर:.. (६)

O Agni, whatever good you will do for the sacrificer, that is truly yours, O Angiras.

हे अग्नि! तुम यज्ञ में हवि देने वाले यजमान का जो कल्याण करते हो, वह वास्तव में तुम्हारी ही प्रसन्नता का साधन बनता है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उप त्वाग्ने दिवेदिदिवे दोषावस्तर्धिया वयम्. नमो भरन्त एमासि.. (७)

O Agni, we approach you daily, morning and evening, with devotion and offerings. We come to you with reverence.

हे अग्नि! हम सच्चे हृदय से तुम्हें रात-दिन नमस्कार करते हैं और प्रतिदिन तुम्हारे समीप आते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
राजन्नमध्वराणां गोपाभृतस्य दीदिदिम्, वर्धमानं त्वे दमे.. (८)

O King, you are the protector of sacrifices, shining with divine glory, and you increase prosperity in your realm.

हे अग्नि! तुम प्रकाशवान्, यज्ञ की रचना करने वाले और कर्मफल के द्योतक हो. तुम यज्ञशाला में बढ़ने वाले हो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
स नः पितेव सूनवेऽग्ने सूपायनो भव. सवस्त्वा नः स्वस्तये.. (९)

O Agni, be as a father to us, a benevolent guide. May you lead us to well-being and prosperity.

हे अग्नि! जिस प्रकार पुत्र पिता को सरलता से पा लेता है, उसी प्रकार हम भी तुम्हें सहज ही प्राप्त कर सकें. तुम हमारा कल्याण करने के लिए हमारे समीप निवास करो. (९)

Mandala 1 · Verse 1
अश्विना यज्वरीरिषो द्रวัตयाणी शुभस्पती. पुरुभुजा चनस्यतम्.. (१)

O Ashvins, swift and auspicious lords of sacrifice, accept these nourishing offerings.

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारी भुजाएं विस्तीर्ण एवं हवि ग्रहण करने के लिए चंचल हैं. तुम शुभ कर्म के पालक हो. तुम दोनों यज्ञ का अन्न ग्रहण करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अश्विना पुरूदं salsa नरा शवीर्या धिया. धिषण्या वनंतं गिरः.. (२)

O powerful Ashvins, you who are praised by hymns, may your divine wisdom and strength protect us.

हे अश्विनीकुमारो! तुम अनेक कर्म वाले, नेता और बुद्धिमान् हो. तुम दोनों आदरपूर्ण बुद्धि से हमारी स्तुति सुनो. (२)


Mandala 1 · Verse 3
दसा युवाकवः सुता नासत्या वृकबर्हिषः. आ यातं रुद्रवर्तनी.. (३)

O Nasatyas, you two youthful, powerful sons, come with your swift steeds.

हे शत्रु विनाशक, सत्यभासी और शत्रुओं को रुलाने वाले अश्विनीकुमारो! सोम रस तैयार करके बिछे हुए कुशों पर रख दिया गया है. तुम इस यज्ञ में आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
इन्द्रा याहि चित्रभानो सुता इमे त्वयावः. अवीभिष्टना पूतासः.. (४)

O Indra, come, O brilliant one, these libations are for you. By you, we are purified.

हे विचित्र प्रकाश वाले इंद्र! ऋषियों की उंगलियों द्वारा निचोड़ा गया, नित्य शुद्ध यह सोम रस तुम्हारी इच्छा कर रहा है. तुम इस यज्ञ में आओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
इन्द्रा याहि धियेषितो विप्रजूत: सुतावत: उप ब्रह्मण वाचत:.. (५)

O Indra, come, invoked by intellect, urged by the wise, and with your Soma-drink, approach our hymns.

हे इंद्र! तुम हमारी भक्ति से आकर्षित होकर इस यज्ञ में आओ. ब्राह्मण तुम्हारा आह्वान कर रहे हैं. तुम सोम रस लिए हुए वाघत नामक पुरोहित की प्रार्थना सुनने के लिए आओ. (५)

Mandala 1 · Verse 6
इन्द्रा याहि तूतजान उप ब्रह्माणि हरिषः सुते दधिश्व नश्नः.. (६)

O Indra, come with haste to our hymns, and bestow upon us the fruits of the Soma offering.

हे अश्व के स्वामी इंद्र! तुम हमारी प्रार्थना सुनने के लिए शीघ्र आओ और सोम रस से युक्त इस यज्ञ में हमारा अन्न स्वीकार करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
ओमासश्चर्षणीधृतो विश्वे देवास आ गत. दाक्षांसो दाशुषः सुतम्.. (७)

O divine beings, upholders of all creation, come forth! Accept the offerings of the devoted sacrificer and bless his son.

हे विश्वेदेवगण! तुम मनुष्यों के रक्षक एवं पालन करने वाले हो. अव्ययदाता यजमान ने सोम रस तैयार कर लिया है, तुम इसे ग्रहण करने के लिए आओ. तुम लोगों को यज्ञ का फल देने वाले हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
विश्वे देवासो अप्पतुः सुतमा गन्त तूर्णयः. उस्सा इव स्वसरणि.. (८)

The gods, like the dawn, arrive swiftly on their own paths, bringing forth the radiant son.

हे वृष्टि करने वाले विश्वेदेवगण! जिस प्रकार सूर्य की किरणें बिना आलस्य के दिन में आती हैं, उसी प्रकार तुम तैयार सोम रस को पीने के लिए जल्दी आओ. (८)

Mandala 1 · Verse 9
विश्वे देवासो असिध एहिमायासो अदृहः. मेधं जुषन्त वह्रयः.. (९)

The gods, who are all-pervading and possess great power, accept the offerings of those who are devoted and bring them forth.

विश्वेदेवगण नाशरहित, विस्तृत बुद्धि वाले तथा वैर से हीन हैं. वे इस यज्ञ में पधारें. (९)

Mandala 1 · Verse 1
सुरूपकृत्तुमये सुदुधामिव गोदुहे. जुहूमसि घविद्यवि.. (१)

We offer to you, the beautiful maker, as the cow yields sweet milk, our oblations.

यथा प्र.कार ग्वाला दुग्ध दुहने के लिए गाय को बुलाता है, उसी प्रकार हम भी अपनी रक्षा के लिए सुंदर कर्म करने वाले इंद्र को प्रतिदिन बुलाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
उप नः सवनां गहि सोमस्य सोमपाः पिब. गोदा इन्द्रवतो मदः.. (२)

Come to our libations, O drinker of Soma, and drink the Soma. May this intoxicating Soma bring us cows and strength, O Indra.

हे सोमपान करने वाले इंद्र! तुम सोमपान के लिए हमारे त्रिवर्ण यज्ञ के पास आओ.

Mandala 1 · Verse 3
अथा ते अन्तमानां विद्यम सुमतीनाम्. मा नो अति ख्य आ गहि.. (३)

May we attain the favor of those who possess good intellect and wisdom. Do not overlook us or pass us by.

हे इंद्र! हम सोमरस पान करने के पश्चात् तुम्हारे अत्यंत समीपवर्ती एवं शोभन-बुद्धि वाले लोगों के बीच रहकर तुम्हें जानें. तुम भी हमें छोड़कर दूसरों को दर्शन मत देना. तुम हमारे समीप आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
परेहि विग्रमस्तमिन्द्रं पृच्छा विपाश्चितम्. यस्ते सखिभ्य आ वरम्.. (४)

Ask Indra, the wise, for the boon that he has granted to his friends.

हे यजमान! बुद्धिमान् एवं हिंसा रहित इंद्र के पास जाकर मुझ बुद्धिमान् होता के विषय में पूछो. वे तुम्हारे मित्रों को उत्तम धन देते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उत ब्रुवन्तु नो निदो निन्त्यतश्चिदारत. दधाना इन्द्र इषुः.. (५)

Let the critics speak their criticisms, and let the censured be censured; for the wise, like Indra with his arrows, hold firm to their purpose.

सदा इंद्र की सेवा करने वाले हमारे पुरोहित इंद्र की स्तुति करें. इंद्र की निंदा करने वाले लोग इस देश के अतिरिक्त अन्य देशों से भी निकल जावें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
उत नः सुभगां अरिवोर्येयुद्सम कृष्यः. स्यामदिन्द्रस्य शर्मणि.. (६)

May we, blessed and free from enemies, attain Indra's protection and prosperity.

हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम्हारी कृपा से शत्रु और मित्र दोनों हमें सुंदर धन वाला कहते हैं. हम इंद्र की कृपा से प्राप्त सुख से जीवन बितावें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
एमाशुशाशवे भर यज्ञाश्रयं नृमादनम्. पतयन्मन्दयत् सखम्.. (७)

This offering, the support of sacrifice, brings joy to men; it is a friend that, though it may slow down, does not fall.

यह सोमरस तुरंत नशा करने वाला एवं यज्ञ की शोभा है. यह मनुष्यों को मस्त करने वाला, कार्यसाधक और आनंददाता इंद्र का मित्र है. यज्ञ में व्याप्त इंद्र को यह सोमरस दो. (७)


Mandala 1 · Verse 8
अस्य पीत्वा शतकतो घनो वृत्राणमभवः. प्रावो वाजेषु वाजिनम्.. (८)

Having drunk this, O Indra, you became mighty and slew Vritra. You protected the strong ones in battles.

हे सौ यज्ञ करने वाले इंद्र! इसी सोमरस को पीकर तुमने वृत्र आदि शत्रुओं का नाश किया था और युद्धक्षेत्र में अपने योद्धाओं की रक्षा की थी. (८)

Mandala 1 · Verse 9
तं त्वा वाजेषु वाजिनं वाजयमः. शतकतो. धनानामिन्द्र सातये.. (९)

O powerful Indra, we invoke you, the giver of strength, to bestow upon us wealth and sustenance.

Mandala 1 · Verse 10
यो रायोऽवनिर्महान्त्सुपारः सुन्वतः सखा. तस्मा इन्द्राय गायत.. (१०)

Sing to Indra, the great protector of wealth, the generous friend of the sacrificer.

हे ऋत्विज्! जो इन्द्र धन का रक्षक, गुणसंपन्न, सुंदर कार्यों को पूर्ण करने वाला तथा यजमान का मित्र है, उसी को प्रसन्न करने के लिए स्तुति करो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
codayitrī sūnṛtānāṁ cetantī sumatīnām | yajñaṁ dadhe sarasvatī

Mandala 1 · Verse 12
maho arṇaḥ sarasvatī pra cetayati ketunā | dhiyo viśvā vi rājati

Mandala 1 · Verse 1
आ त्वेता नि षिीदतेन्द्रभि प्र गायत. सखायः स्तोमवाहसः.. (१)

Come, O Indra, and sit here; friends, sing praises to him who bears the hymns.

हे स्तुति करने वाले मित्रो! शीघ्र आओ और यहाँ बैठो. तुम लोग इन्द्र की स्तुति करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
पुरुस्तमं पुरुनामीशानं वार्याणाम्. इन्द्रं सोमे सचा सुते.. (२)

The supreme Purusha, Lord of all, is praised with Soma, the most excellent.

सोमरस तैयार हो जाने पर सब लोग एकत्र हो जाओ और शत्रुओं का नाश करने वाले एवं श्रेष्ठ धनों के स्वामी इन्द्र की स्तुति करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स घा नो योग आ भुวัตृ स राये स पुरन्ध्याम्. गAMD वाजेभिरा स नः.. (३)

May He, the Divine, be our union, our wealth, and our sustenance, bringing us strength and nourishment.

वह ही इन्द्र हमारे अभावों को पूरा करें, हमें धन दें, अनेक प्रकार की बुद्धि प्रदान करें और शांति-भांति के अस्त्र लेकर हमारे पास आवें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यस्य संस्थे न वृणवते हरी समत्सु शत्रवः. तस्मा इन्द्राय गायत.. (४)

Sing to Indra, whose might in battles none of the enemies can resist.

युद्ध में जिस इन्द्र के घोड़ों सहित रथ को देखकर शत्रु भाग जाते हैं, उन्हीं इन्द्र की स्तुति करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
सुतपावने सुता इमे शुच्यो यन्ति वीतये. सोमासो दध्याशिरः.. (५)

These pure sons, born of the purifying father, go forth to the sacrifice, like Soma mixed with curd.

यह पवित्र और विशुद्ध सोमरस यज्ञ में सोमपान करने वाले के समीप पीने हेतु अपने आप पहुँच जाता है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वं सुतस्य पीतये सहो वृद्धो अजययथाः. इन्द्र ज्येष्ठ्याय सुकृतो.. (६)

You, having grown strong, have obtained victory for your son's nourishment, and for Indra's supremacy, through righteous deeds.

हे सुंदर कर्म करने वाले इन्द्र! तुम सभी देवों में बड़े होने के कारण सोमपान करने के लिए सबसे अधिक उत्साहित रहते हो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
आ त्वा विशन्तवाशवः सोमास इन्द्र गिर्र्णणः. शं ते सन्तु प्रचेतसे.. (७)

May these Soma-infused offerings, O Indra, praised by singers, bring you joy and be beneficial to your wise mind.

Mandala 1 · Verse 8
त्वां स्तोमा अवृधन् त्वामुक्था शतक्रतो. त्वां वर्धन्तु नो गिरः...(८)

May praises and hymns exalt You, O powerful one. May our words of praise increase Your glory.

हे सौ यज्ञ करने वाले इंद्र! ऋग्वेद के मंत्रों एवं सोम-संबंधी मंत्रों ने तुम्हारी प्रशंसा की है। हमारी स्तुतियां भी तुम्हारी प्रतिष्ठा बढ़ावें। (८)

Mandala 1 · Verse 9
अक्षितोतिः सनेदिमं वाजिमिन्द्रः सहस्गणम्. यस्मिन् विश्वानि पौंस्या.. (९)

Indra, the powerful and life-giving, has bestowed upon us this strength, in whom all heroic deeds reside.

रक्षा में सदा तत्पर रहने वाले इंद्र इस हजार संख्या वाले सोम रूपी अन्न को ग्रहण करें। इसी में समस्त शक्तियां रहती हैं। (९)

Mandala 1 · Verse 10
मा नो मर्ता अभि द्रुहन् तनुनामिन्द्र गिर्वणः. ईशानी यवया वधम्.. (१०)

May mortals not harm us with their bodies, O Indra, praised by hymns; banish death.

हे स्तुति करने के योग्य इंद्र! तुम शक्तिशाली हो. तुम ऐसी कृपा करना कि हमारे शत्रु हमारे शरीर पर चोट न कर सकें. तुम उन्हें हमारा वध करने से रोकना. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
युञ्जन्ति ब्रधमरुं चरन्ते परि तस्थुषः. रोचन्ते रोचना दिवि.. (१)

The radiant ones, moving and stationary, unite and shine brightly in the heavens.

जो इंद्र तेजस्वी सूर्य के रूप में, अहिंसक अग्नि के रूप में तथा सर्वत्र गतिशील वायु के रूप में स्थित हैं, सब लोकों में निवास करने वाले प्राणी उन्हीं इंद्र से संबंध रखते हैं. उन्हीं इंद्र की मूर्ति आकाश में नक्षत्रों के रूप में चमकती है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
युञ्जन्त्यस्य काम्या हरी विपक्षसा रथे. शोणा धृष्णुं नृवाहसा.. (२)

The divine steeds, red and powerful, draw His chariot, fulfilling desires and conquering all opposition.

सारथि उन इंद्र के रथ में हरि नाम के सुंदर, रथ के दोनों ओर जोड़ने योग्य, लाल रंग के और शक्तिशाली दो घोड़ों को जोड़ते हैं. वे घोड़े इंद्र एवं उनके सारथि को ढोने में समर्थ हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे. समुष्षिद्रजायथाः.. (३)

You, the radiant one, illuminate the unilluminated, bestowing beauty upon the formless. You are born, breaking through all limitations.

हे मनुष्यो! यह आश्चर्य देखो कि यह इंद्र रात को बेहोश प्राणियों को प्रातः: होश में लाते हुए और रात में अंधकार के कारण रूपहीन पदार्थों को प्रातः: रूप प्रदान करते हुए सूर्य रूप में किरणें बिखेरते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
आदह स्वधामनु पुनर्गर्भत्वेमेरिरे. दधाना नाम यजियम्.. (४)

Having consumed their own portions, they were reborn, bearing the name of the worthy.

इसके पश्चात् मरुद्गण ने यज्ञ के योग्य नाम धारण करके अपने प्रतिवर्ष के नियम के अनुसार बादलों में जलरूपी गर्भ को प्रेरित किया है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
वीळु चिदारुजन्तुभिर्गुहा चिदिन्द्र वृद्भिः अविन्द उ siy अनु.. (५)

The divine consciousness, like a hidden jewel, is discovered by those who are pure and strong in their inner resolve.

हे इंद्र! तुमने मरुद्गण के साथ मिलकर गुफा में छिपाई हुई गायों को खोजकर वहां से निकाला। वे मरुद्गण दृढ़ स्थान को भी भेदन करने एवं एक स्थान की वस्तु को दूसरी जगह में ले जाने में समर्थ हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
देवयन्तो यदा मतिमच्छ विद्दुसुं गिरः. महमन्पूषत श्रुतम्.. (६)

When the gods, desiring wisdom, uttered these profound words, the wise ones listened attentively.

स्तुति करने वाले लोग स्वयं देवभाव प्राप्त करने की इच्छा से धन के स्वामी, शक्तिशाली एवं विख्यात मरुद्गण को लक्ष्य करके उसी प्रकार स्तुति कर रहे हैं, जिस प्रकार वे इंद्र की स्तुति करते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
इन्द्रोण सं हि दृक्षसे सज्जमानो अभिख्युषा. मन्दू समानवर्चा.. (७)

You are seen with Indra, adorned and shining brightly, possessing equal brilliance.

हे मरुद्गण! भयरहित इंद्र के साथ तुम्हारी बहुत घनिष्ठता देखी जाती है. तुम दोनों नित्य प्रसन्न और समान तेज वाले हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अनवधैरभिर्भिमुखः सहस्दचर्ति. गण्गिन्द्रस्य काम्यैः.. (८)

Facing the flawless, the Lord of the Gaṇas, with his divine attendants, moves with great power.

यह यज्ञ दोषरहित, देवलोक में निवास करने वाले तथा फल देने के कारण कामना करने योग्य मरुद्गण के साथ होने के कारण इंद्र को बलवान् समझकर पूजा-अर्चना करता है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अतः परिजम्ना गहि दिवो वा रोचनादधि. समस्मिन् juzate गिरः.. (९)

From the sky's bright expanse, let the praises ascend, for in this sacred space, hymns are harmoniously offered.

हे चारों ओर व्यापक मरुद्गण! तुम द्युलोक, आकाश या दीप्त सूर्य मंडल से इस यज्ञ में आओ. पुरोहित-समूह इस यज्ञ में तुम्हारी भली प्रकार स्तुति कर रहा है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
इतो वा सातिमीमहे दिवो वा पार्थिवादधि. इन्द्रं महो वा रजसः.. (१०)

We seek the divine light from the heavens or the earth, or the great radiance of the firmament.

हम इंद्र देव की प्रार्थना इसीलिए करते हैं कि वे पृथ्वीलोक, आकाश या वायुलोक से हमें धन प्रदान करते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्रमिद् गाथिनो बृहदिन्द्रमकेभिरकिणः. इन्द्रं वाणीरनुषत.. (१)

The singers praise Indra; the hymn-makers glorify Indra. The voices sing of Indra.

सामवेद का गान करने वालों ने सामगान के द्वारा, ऋग्वेद का पाठ करने वालों ने ऋचाओं द्वारा और यजुर्वेद का पाठ करने वालों ने मंत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति की है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इन्द्र इद्धयोः सचा सम्मिश्ल आ वाचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (२)

Indra, the wielder of the thunderbolt, shines with golden brilliance, united with the gods in his might and speech.

इंद्र इंद्रियों: सच्चा सम्मिश्ल आ वाचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इन्द्रो दीर्घाय चक्षस आ सूर्य रोहयद दिवि. वि गोभिरद्रिमैरयत्.. (३)

Indra, the great seer, raised the sun to the sky, and with his might, he made the mountains yield.

इंद्र ने मनुष्यों को निरंतर देखने के लिए सूर्य को आकाश में स्थापित किया है. सूर्य अपनी किरणों द्वारा पर्वत आदि समस्त संसार को प्रकाशित कर रहे हैं। (३)

Mandala 1 · Verse 4
इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्रप्रधनेषु च. उग्र उग्राभिरुतिभिः.. (४)

O Indra, in our battles and our thousandfold victories, be our powerful protector with your mighty boons.

हे शत्रुओं द्वारा न हारने वाले इंद्र! अपनी अमोघ रक्षण शक्ति के द्वारा ऐसे महायुद्धों में हमारी रक्षा करो जो हजारों गर्जों, अस्त्रों आदि का लाभ देने वाले हों। (४)

Mandala 1 · Verse 5
इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमभं हवमहे. युजं वृत्रेषु वज्रिणम्.. (५)

We invoke Indra, the great giver, the mighty wielder of the thunderbolt, who is the ally in battles against the Vritras.

इंद्र हमारी सहायता करने वाले तथा धन-लाभ का विरोध करने वाले हमारे शत्रुओं के लिए वज्रधारी हैं. हम अल्प अथवा विपुल धन पाने के लिए हम इंद्र का आह्वान करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
स नो वृत्रणमुं चरूं SATRADAVANPA VRI. ASAMBHAYAMPRATIṢKUT.. (६)

May that divine power, which is the protector of all, bestow upon us strength and protection against all obstacles.

हे इंद्र! तुम हमारे लिए इच्छित फल देने वाले तथा वृष्टि प्रदान करने वाले हो. तुम हमारे लाभ के लिए उस मेघ का मर्दन करो. तुमने कभी भी हमारी प्रार्थना अस्वीकार नहीं की है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
तुज्जेतुज्जे य उत्तरे स्तोमा इन्द्रस्य वज्रिणः. न विन्धे अस्य सुष्टुतिम्.. (७)

Even the most powerful praises cannot reach the might of Indra's thunderbolt. His greatness is beyond all human hymns of praise.

भिन्न-भिन्न फल देने वाले देवताओं के लिए जिन उत्तम स्तुतियों का प्रयोग किया जाता है, वे सब वज्र धारण करने वाले इंद्र के लिए हैं. इंद्र के अनुरूप स्तुति को मैं नहीं जानता. (७)

Mandala 1 · Verse 8
वृषा यूथेव वंसगः कृषीरित्येर्जसा. ईशानों अप्रतिष्कुत... (८)

Like a bull in a herd, the strong one advances, the ruler, unhindered.

जिस प्रकार तेज चाल वाला बैल धेनु समूह को अपने बल से अनुगृहीत करता है, उसी प्रकार इच्छाओं को पूरा करने वाले इंद्र मनुष्यों को शक्तिशाली बनाते हैं. इंद्र समर्थ हैं एवं किसी की प्रार्थना को ठुकराते नहीं हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
य एकश्रृणीणां वसूनामिराज्याति. इन्द्रः पञ्च क्षितीनाम्.. (९)

Indra, the sovereign ruler of the five peoples, is the supreme lord of the Vasus.

इंद्र समस्त मानवों, संपत्तियों और पंच-क्षितियों पर निवास करने वाले वर्णों पर शासन करने वाले हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
इन्द्रं वो विश्वतस्पारि हवमहे जनेभ्यः. अस्माकमस्तु केवलः.. (१०)

We invoke Indra, the protector of all, for the sake of all beings. May he be exclusively ours.

हे ऋत्विजो! और यजमानो! हम सर्वश्रेष्ठ इंद्र का आह्वान तुम्हारे कल्याण के निमित्त करते हैं. इंद्र केवल हमारे हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
एन्द्र सानसिं रयिं सजित्वानां सदासहम्, वर्षिष्ठमूतये भर.. (१)

O Indra, grant us abundant wealth and strength, the ever-present, the most powerful, for our protection.

हे इंद्र! हमारी रक्षा के लिए ऐसा धन दो जो हमारे भोग के योग्य, शत्रुओं को विजय करने में सहायक तथा शत्रुओं की हार का कारण बने. (१)

Mandala 1 · Verse 2
नि येन मुष्टिहृत्या नि वृत्रा रुणधामहे, त्वोतासो न्यर्वता.. (२)

By whom, having grasped with our fists, we obstruct Vritra, protected by you, we shall overcome.

उस धन से एकत्र किए गए योद्धाओं के मुक्के की चोट से हम शत्रु को रोक देंगे. तुम्हारे द्वारा सुरक्षित होकर हम घोड़ों की सहायता से शत्रुओं को दूर भगाएंगे. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इन्द्र त्वोतास आ वर्य वज्रं घना दद्महि, जयेम सं युधि स्पृधः.. (३)

O Indra, we offer you praise and strength, and with your thunderbolt, we shall conquer all our enemies in battle.

हे इंद्र! तुम्हारे द्वारा सुरक्षित होकर हम अत्यंत दृढ़ वज्र को धारण करके अपने से द्वेष करने वाले शत्रुओं को पराजित करेंगे. (३)

Mandala 1 · Verse 4
वयं शूरभिरभृन्दिन्द्र त्वया युजा वयम्, सासहग्राम पृत्त्यन्तः.. (४)

With you, Indra, as our ally, we, the brave, shall conquer all enemies in battle.

हे इंद्र! हम तुम्हारी सहायता पाकर अपने शस्त्रधारी सैनिकों को लेकर शत्रु सेना को जीत सकेंगे. (४)

Mandala 1 · Verse 5
महों इन्द्रः परश्व नु महित्वमस्तु वज्रिणे, धौर्ना प्रथना शवः.. (५)

May Indra, the wielder of the thunderbolt, be greatly glorified with immense power and strength.

इंद्र देव शरीर से बलिष्ठ एवं गुणों से युक्त होने के कारण महान् हैं. वज्रधारी इंद्र को पूर्वोक्त महत्त्व प्राप्त हो. इंद्र की सेना आकाश के समान विस्तृत हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
समोहे वा य आशत नरस्तोक्सस्य सनितौ, विप्रासो वा धियावः.. (६)

Whether a man, or a child, or the wise, all are subject to delusion.

जो वीर पुरुष युद्धक्षेत्र में जाने वाले हैं, पुत्र पाने की इच्छा रखते हैं अथवा जो बुद्धिमान् ज्ञान की अभिलाषा रखते हैं, वे सब इंद्र की कृपा से सिद्धि प्राप्त करें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
यः क्षिः सोमपातमः समुद्र इव पिन्वते, उर्वीरापो न काकुदः.. (७)

He who drinks Soma, swells like the ocean, and the waters flow forth like a mother's milk.

इंद्र का जो उदर सोम-रस पीने के लिए सदा तत्पर रहता है, वह समुद्र के समान विस्तृत है. जिस प्रकार जीभ का पानी कभी नहीं सूखता, उसी प्रकार इंद्र के उदर में स्थित सोम-रस भी कभी नहीं सूखता. (७)

Mandala 1 · Verse 8
एवा ह्यस्य सूतता विरष्णी गोमती मही. पक्वा शाखा न दाशुषे.. (८)

She is indeed the mother, the giver of life, the earth, and the great nourisher. She is the ripe fruit for the devoted giver.

इंद्र के मुख से निकली हुई वाणी सत्य, विविध विशेषताओं से युक्त, महती एवं गौएं देने वाली है, यज्ञ में हव्य देने वाले यजमान के लिए तो इंद्र की वाणी पके हुए फलों से लदी डाली के समान है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
एवा हि ते विभूतय ऊतय इन्द्र मावते. सहश्रुति सन्ति दाशुषे.. (९)

Your powers and protections, O Indra, are indeed manifold, and they are present for the giver of offerings.

हे इंद्र! तुम्हारी विभूतियां हव्य प्रदान करने वाले हमारे समान यजमान की रक्षा करने वाली एवं शीघ्र फल देने वाली हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
एवा ह्यस्य काम्या स्तोम उक्थं च शंस्या. इन्ड्राय सोमपीतये.. (१०)

These hymns and chants are indeed for Him, for Indra, to drink the Soma.

सोमपान करने वाले इंद्र के लिए सामवेद एवं ऋग्वेद के मंत्र अभिलषित हैं. इंद्र सोमपान संबंधी मंत्रों की इच्छा करते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्रहि मत्स्यन्धसो विश्वेभिः सोमपर्वभिः. महॉ अभिष्टिरोजसा.. (१)

O Indra, with all the Soma-drinking lords, you are great in your might and power.

हे इंद्र! इस यज्ञ में आकर सोम-रस रूपी समस्त भोज्य पदार्थों से प्रसन्न बनो. इसके पश्चात् तुम परम शक्तिशाली बनकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
एमैनं सृजता सुते मन्दिमिन्द्राय मन्दिने, चक्रि विश्श्रानि चक्रे.. (२)

The gods, in their joy, created him, the delightful Indra, the all-pervading one.

यदि आनंद देने वाला एवं कार्य संपादन की प्रेरणा करने वाला सोम-रस तैयार हो तो उसे प्रसन्न एवं संपूर्ण कार्य सिद्ध करने वाले को भेंट करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
मत्स्वा सुशिप्र मन्दिभिः स्तोमेभिरभिश्ववर्षेण, सचेषु सवनेषु.. (३)

He rained down blessings with joyous hymns and offerings in the Soma sacrifices.

हे सुंदर नासिका एवं ठोंडी वाले तथा समस्त यजमानों द्वारा पूज्य इंद्र! तुम आनंद बढ़ाने वाली स्तुतियों से प्रसन्न होकर इस सवन नामक यज्ञ में पधारो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अस्मग्रमिन्द्र ते गिरः प्रति त्वामुदह्रासत. अजीषा वृष्भं पतितम्.. (४)

O Indra, our hymns are offered to you, the mighty bull, who has been praised.

हे इंद्र! मैंने तुम्हारी स्तुतियां की हैं. वे तुम्हारे समीप स्वर्ग में पहुंच गई हैं. तुमने उन स्तुतियों को स्वीकार कर लिया है. तुम मनचाही वर्षा करने वाले एवं यजमान के रक्षक हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
सं चोद्य चित्रमर्वाग्राध इन्द्र वरेण्यम्. असदिते विश्वु प्रभु.. (५)

O Indra, the most praiseworthy, you are the source of all wonders, the supreme ruler of the universe, who bestows all blessings.

Mandala 1 · Verse 6
अस्मान्स्तु तत्र चोदयेन्द्र रायै रभस्वतः तुविद्युम्न यशस्वतः..(६)

May Indra, the powerful and glorious, inspire us with strength and brilliance.

हे अधिक संपत्ति वाले इंद्र! धन की सिद्धि के लिए हमें यज रूपी कर्म की प्रेरणा दो. हम उद्योगशील एवं कीर्ति वाले हों. (६)

Mandala 1 · Verse 7
सं गोमदिन्द्र वाजवदस्मे पृथु श्रवो बृहत्. विश्वायुर्हृक्षितम्.. (७)

O Indra, bestower of strength and nourishment, grant us abundant fame and sustenance, filling our lives with fullness.

हे इंद्र! हमें गायों एवं अन्न के साथ-साथ अधिक मात्रा में धन दो. यह धन इतना विस्तृत हो कि समस्त आयु भर खर्च होने पर भी समाप्त न हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अस्मे धेहि श्रवो बृहद् घुम्नं सहस्सातमम् इन्ट्र ता रथिनि.. (८)

O Indra, grant us abundant fame, immense wealth, and the strength to overcome all obstacles.

हे इंद्र! हमें विशाल यश, अनेक रथों में भरा हुआ अन्न एवं ऐसा धन दो, जिससे हम हजारों की संख्या में दान कर सकें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
वसोरिन्द्रं वसुपतिं गीर्भिर्गुणन्तं ऋष्मिमयम्. होम गन्तारमूतुये.. (९)

Praise Indra, the lord of wealth and brilliance, with hymns, the giver of sustenance.

अपने धन की रक्षा करने के लिए हम स्तुतियों द्वारा इंद्र को बुलाते हैं. इंद्र धन के रक्षक, ऋचाओं से प्रेम करने वाले एवं यज्ञस्थान में गमन करने वाले हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
सुतेसुते न्योक्से बृहद् बृहद् अद्रिः. इन्द्राय शुष्मचर्ति.. (१०)

The great mountain, the source of many sons, is strong for Indra.

सब यजमान प्रत्येक यज में इंद्र के महान पराक्रम की प्रशंसा करते हैं. इंद्र यज में सदा निवास करने वाले एवं शक्तिसंपन्न हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
गायन्ति त्वा गायत्रिणो ऽर्चन्त्यर्कमकिणः. ब्रह्माणस्त्वा शतक्रत उद्दशमिष येमिरे. (१)

The singers sing of You, the worshippers honor the Sun, and the Brahmins, O Indra, have established You as the supreme goal.

हे शतक्रतु इंद्र! उद्गाता तुम्हारी स्तुति करते हैं. पूजाथं मंत्र बोलने वाले होता पूजा के योग्य इंद्र की अर्चना करते हैं. जिस प्रकार बांस के ऊपर नाचने वाले कलाकार बांस को ऊपर उठाते हैं, उसी प्रकार स्तुति करने वाले ब्राह्मण तुम्हारी उन्नति करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यत्सानो: सानुमारूहद् भूर्यस्पष्टं कर्त्वम्. तदिन्द्रो अर्थं चेतति यूथेन वृष्णिरेजित.. (२)

As the mountain peak is ascended, much becomes clear. So Indra, the divine, understands the purpose, like a strong bull leading the herd.

Mandala 1 · Verse 3
युक्ष्वा हि केशिना हरी वृषणा कक्ष्या अथा न इन्द्र सोमपा गिरामुपश्रुति चर.. (३)

O Indra, the drinker of Soma, yoke your swift, powerful horses, and listen to our hymns.

हे सोमपानकर्ता इन्द्र! अपने केशर वाले, युवा एवं पुष्ट शरीर वाले घोड़ों को रथ में जोड़ो. इसके पश्चात् हमारी स्तुतियाँ सुनने के लिए समीप आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
एहि स्तोमों अभ् स्विराभि गृणीह्या रुव. ब्रह्म च नो वसो सचेन्द्र यज्ञं च वर्धय.. (४)

O Indra, with your mighty powers, praise and proclaim your greatness. Bless our hymns and increase our sacrifice.

हे सर्वव्यापक इन्द्र! इस यज्ञ में आओ. उद्गाता द्वारा की हुई स्तुति की प्रशंसा करो, अश्वयुं की स्तुतियों का समर्थन करो और अपने शब्दों से सबको आनंद दो. इसके पश्चात् हमारे अन्न के साथ-साथ इस यज्ञ को भी बढ़ाओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उक्थमिन्द्राय शंस्यं वर्धनं पुरोनिषिधे. शक्रो यथा सुतेषणो रणणत् सख्युश्च.. (५)

Praise the hymn for Indra, the increaser, the one who is praised. As Indra, eager for the soma, rejoices with his friend.

अगणित शत्रुओं को रोकने वाले इन्द्र के लिए गाए गए गीत वृद्धि पाते रहें. इन गीतों के कारण शक्तिशाली इन्द्र हमारे पुत्रों एवं मित्रों के मध्य महान् शब्द करें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तमिन् सखित्वं ईमहे तं रायें तं सुवीर्यं. स शक्र उत नः शक्दिन्द्रो वसु दयमानः.. (६)

We seek friendship with Him, for wealth and for strength. May that powerful Indra, the giver of riches, bestow strength upon us.

हम लोग मैत्री, धन और शक्ति पाने के लिए इन्द्र के समीप जाते हैं. बलशाली इन्द्र हमें धन प्रदान करके हमारी रक्षा करते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
सुविवृतं सुनिरजमिन्द्र त्वादातमदिग्मशः. गवामप व्रजं वृधि कृणुष्व राधो अदिं.. (७)

O Indra, you are the protector of all, the giver of strength and light. Increase the herds of cows and bestow upon us abundant wealth.

हे इन्द्र! तुम्हारे द्वारा दिया हुआ अन्न सर्वत्र फैला हुआ और सुविधापूर्वक मिलने वाला है. हे वज्र धारण करने वाले इन्द्र! दूध, घी आदि रस के लाभ के लिए गौशाला का द्वार खोलो और हमें धन प्रदान करो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
नहि त्वा रोदसी उभे ऋधायमाणीमिवन्तः. जेषः स्वर्वीतरिपः सं गा असमभ्यं ध्रुहि.. (८)

Neither the two worlds nor the heavens can conquer you, O powerful one, who are the source of all strength. You are the protector of all beings, and all things are established in you.

हे इन्द्र! जिस समय तुम शत्रु का वध करते हो, उस समय धरती और आकाश दोनों में

Mandala 1 · Verse 9
आश्चुकर्णं श्रुधी हवं नृ चिद्धिष्व मे गिरः । इन्द्र स्तोममिमं मम कृष्वा युजश्चिन्तम्.. (९)

Hear my invocation, O Indra, and accept my praises, for I have called upon you with devotion. Strengthen my resolve and accept this hymn.

हे इंद्र! तुम्हारे दोनों कान चारों ओर की बात सुनने वाले हैं, इसलिए हमारी पुकार जल्दी सुनो. हमारी स्तुतियों को अपने मन में स्थान दो. जिस प्रकार मित्र की बातें स्मरण रहती हैं, उसी प्रकार हमारी ये स्तुतियां भी अपने पास रखो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
विद्वृक्षा हि त्वा वृषन्तं वाजेषु हवन्श्रुतम्. वृषन्तम्मस्य हूहं ऊति सहससामाम्.. (१०)

O powerful and widely invoked one, we call upon you, the bestower of strength, for your swift and abundant protection.

हे इंद्र! हम तुम्हें जानते हैं कि तुम मनचाही वर्षा करते हो तथा युद्धस्थल में हमारी प्रार्थना सुनते हो. तुम समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हो. हम हजारों प्रकार के धन देने वाली तुम्हारी रक्षा का आह्वान करते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्र विश्वा अवीड्धन्त्समृदव्यचसं गिरः रथीतमं रथीनां वाजानां सत्वपतिं पत्तिम्.. (१)

He who is the best of charioteers, the lord of wealth and strength, has been praised with hymns, and is the protector of all.

सागर के समान विस्तृत रथ के स्वामियों में श्रेष्ठ, अन्यों के स्वामी एवं सबके पालक इंद्र को हमारी स्तुतियों ने बढ़ाया था. (१)

Mandala 1 · Verse 2
सखे त इन्द्र वाजिनो मा भैम श्वासस्पते. त्वामभि प्र णीणुमो जेतारमपराजितम्.. (२)

O friend Indra, mighty and life-giving, let us not fear; we praise you, the victorious and unconquered.

हे बल के स्वामी इंद्र! तुम्हारी मित्रता पाकर हम शक्तिशाली एवं निर्भय बनें. तुम अपराजेत विजेता हो. हम तुम्हें नमस्कार करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
पूर्वीरन्द्रस्य راتयो न वि दस्यन्त्युत्तः । यदि वाजस्य गोमतः स्तोतृभ्यो महते मघम्.. (३)

The former glories of Indra, the giver of wealth, do not fade; for the praise-singers, he bestows abundant riches from the cattle-possessing abundance.

इंद्र द्वारा किए गए पुराणकालीन दान प्रसिद्ध हैं. यदि वे स्तुतिकर्ताओं को गायक एवं शक्तिपूर्ण अन्न दान करें तो सब प्राणियों की रक्षा हो सकती है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
पुरां भিন্দुर्युवा कविरमितौज। अजयत्. इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्ता वज्री पुरुषुत:.. (४)

Indra, the destroyer of cities, the youthful poet of immeasurable might, the wielder of the thunderbolt, the bestower of many gifts, conquers all actions in the universe.

इंद्र ने पुरभेदकारी, युवा, अमित तेजस्वी, समस्त यज्ञों के धारणकर्ता, वज्रधारक एवं अनेक व्यक्तियों द्वारा स्तुत रूप में जन्म लिया. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वं वलस्य गोमतोऽपवरद्विबो बिलम्. त्वां देवा अभியুষुस्त्युजमानास आविक्षु:.. (५)

You are the cave of the earth, the abode of the cows. The gods, casting aside their fear, have entered you.

हे वज्रधारी इंद्र! तुमने गायों का अपहरण करने वाले बल असुर की गुफा का द्वार खोल दिया था. ब Lastly द्वारा सताए हुए देवों ने उस समय निडर होकर तुम्हें घेर लिया था. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तवाहं शूर रातिभिः प्रत्यायं सिन्धुमावदन्. उपातिषन्त गिरवणो विदुष्टे तस्य कारवः.. (६)

O hero, you are the giver of boons, and the rivers, knowing your greatness, flow towards the ocean, singing your praises.

हे शूर इंद्र! निचोड़े हुए सोम रस के गुणों का वर्णन करता हुआ मैं तुम्हारे धनों से प्रभावित होकर वापस आया हूं. हे स्तुतिपात्र इंद्र! यज्ञकर्ता तुम्हारे समीप उपस्थित होने एवं तुम्हारी कार्यकुशलता को जानते थे. (६)

Mandala 1 · Verse 7
मायाभिरिन्द्र मायिनं त्वं शुष्ममावतिरः. विदुष्टे तस्य मेधिरस्तेषां श्त्रांस्थ्युतिर.. (७)

You, O Indra, with your divine powers, protect yourself from the illusory tricks of the magician. The wise, knowing his deceit, are not ensnared by his illusions.

हे इंद्र! तुमने छल द्वारा मायावी वृष्षण का नाश किया. इस बात को जो मेघावी लोग जानते हैं, तुम उनकी रक्षा करो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
इन्द्रमीशानमोसजाभि स्तोमा अनूषत. सहस्रं यस्य रातय उत वा सन्ति भयूसी:.. (८)

The hymns praise Indra and Ishana, whose nights of giving are a thousand or even more.

शक्ति द्वारा विश्व के स्वामी बनने वाले की स्तुति प्रार्थियों ने की है. इंद्र के धन देने के ढंग हजारों अथवा हजारों से भी अधिक हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
आकीं सूर्यस्य रोचनाद् विश्वान् देवाँ उषबुधः. विप्रे होतेह वक्षति.. (९)

The dawn, awakening all the gods with the sun's radiance, will bring forth the divine offering.

मेधावी एवं देवों के आह्वान करने वाले अग्नि प्रातःकाल जागने वाले देवों को प्रकाशित सूर्य-मंडल से यहां यज्ञ में लावें. (९)

Mandala 1 · Verse 10
विश्वेभिः सोभ्यं मघवन इन्द्रो वायुना. पिबा मित्रस्य धामभिः.. (१०)

O Indra, with the Vasus and the Maruts, drink the Soma, O mighty one, by the grace of Mitra.

हे अग्नि! तुम समस्त देवों, इंद्र, वायु एवं मित्र के तेजों के साथ मधुर सोम का पान करो। (१०)

Mandala 1 · Verse 11
त्वं होता मनुहिंतोऽग्ने यज्ञेषु सीदसि. SEMं नो अध्वरं यज.. (११)

O Agni, you are the priest and the protector of humanity, seated in our sacrifices. Accept this unblemished offering and bless our ritual.

हे होता एवं मानव हितकारी अग्नि! तुम हमारे यज्ञ में बैठो एवं उसको पूर्ण करो.

Mandala 1 · Verse 12
युक्ष्वा ह्यरुषीं रथे हरितो देव रोहितः. तभिर्देवा इहा वह..

O Agni, harness the swift, reddish horses to your chariot and bring the gods here.

युक्ष्वा ह्यरुषीं रथे हरितो देव रोहितः. तभिर्देवा इहा वह.. (१२) हे अग्नि देव! रोहित नामक गतिशील घोड़ों को अपने रथ में जोड़ो एवं उनके द्वारा देवों को यहां लाओ. (१२)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्र सोमं पिब ऋत.ग्ना त्वा विशन्तिवन्दवः. मत्सरसस्तदोकसः.. (१) हे इंद्र! तुम ऋतु के साथ सोमरस पियो. तृप्तिकारक एवं आश्रययोग्य सोम तुम्हारे शरीर में प्रविष्ट हो. (१)

O Indra, drink the Soma with the cosmic order. May the satisfying and life-sustaining Soma enter your being.

इन्द्र सोमं पिब ऋत.ग्ना त्वा विशन्तिवन्दवः. मत्सरसस्तदोकसः..

Mandala 1 · Verse 2
मरुतः पिबत ऋत.ग्ना पोत्राद् यज्ञं पुनीतन. यूयं हि छ सुदानवः..

O Maruts, drink the Soma juice offered by the Potri priest, along with the sacred order; you are indeed generous givers. Purify my sacrifice.

मरुतः पिबत ऋत.ग्ना पोत्राद् यज्ञं पुनीतन. यूयं हि छ सुदानवः.. (२) हे मरुगण! पोत्र नामक ऋत्विक द्वारा दिया हुआ सोमरस ऋतु के साथ पिओ. तुम शोभन दानशील हो. तुम मेरे यज्ञ को पवित्र करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अभि यज्ञं गृणीहि नो न्नावो नेष्टः पिब ऋत.ग्ना. त्वं हि रत्नधा असि..

O householder Tvashta, praise our sacrifice and drink Soma with the seasons. You are indeed the bestower of treasures.

अभि यज्ञं गृणीहि नो न्नावो नेष्टः पिब ऋत.ग्ना. त्वं हि रत्नधा असि.. (३) हे पत्नीयुक्त त्वष्टा! हमारे यज्ञ की प्रशंसा करो एवं ऋतु के साथ सोम पिओ. तुम रत्नदाता हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अग्ने देवा इह सह सादया योनिषु त्रिषु. परि भूष पिब ऋत.ग्ना..

O Agni, invite the gods here to the sacrifice and seat them in their three places; adorn them and drink the Soma with the sacred order.

अग्ने देवा इह सह सादया योनिषु त्रिषु. परि भूष पिब ऋत.ग्ना.. (४) हे अग्नि! देवों को यहां यज्ञ में बुलाओ एवं योनि नामक तीन स्थानों में बैठाओ, उन्हें विभूषित करो एवं ऋतु के साथ सोमरस पिओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
ब्राह्मणादिन्द्र राधसः पिबा सोममूतंर. त्वेद्धि सख्यमस्तृतम्..

O Indra, drink the Soma juice from the priest's vessel after the seasons; in you alone is unfailing friendship.

ब्राह्मणादिन्द्र राधसः पिबा सोममूतंर. त्वेद्धि सख्यमस्तृतम्.. (५) हे इंद्र! तुम ऋतुओं के पश्चात् ब्राह्मणच्छंसी पुरोहित के पात्र से सोमपान करो. तुम्हारी मित्रता टूटने वाली नहीं है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
युवं दक्षं धृतव्रत मित्रावरुणं दॊळभम्. ऋत.ग्ना यज्ञमाशास्थे.. (६) हे व्रतधारणकर्ता मित्र और वरुण! ऋतु के साथ यज्ञ में आओ. हमारा यज्ञ वृद्धिप्राप्त

O Mitra and Varuna, upholders of vows! Come to the sacrifice with the cosmic order. May our sacrifice prosper.

युवं दक्षं धृतव्रत मित्रावरुणं दॊळभम्. ऋत.ग्ना यज्ञमाशास्थे..

Mandala 1 · Verse 7
द्रविणोदा द्रविणसो ग्राहहस्तो अध्वरे. यज्ञेषु देवमीळ्ळे.. (७)

May the giver of wealth, whose hand grasps the sacrificial offering, be praised in our sacrifices.

पुरोहित धन की अभिलाषा से भान्ति-भान्ति के यज्ञों में धनप्रद अग्नि की स्तुति करते हैं. वे सोमलता कूटने के पत्थर हाथ में लिए हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
द्रविणोदा ददातु नो वसूनि यानि श्रुण्विरे. देवेषु ता वनामह.. (८)

May the giver of wealth bestow upon us riches, which we have heard of, and which we desire among the gods.

द्रविणोदा अग्नि हमें सभी सुनी संपत्तियां प्रदान करें. हम उन्हें देवयज्ञ में लगावें. (८)

Mandala 1 · Verse 1
आ त्वा वहन्तु हर्यो वृषणं सोमपीतये. इन्द्र त्वा सूरचक्षसः.. (१)

May the swift steeds carry you, Indra, drinker of Soma, to the sacrifice, O powerful one, whose eyes are like the sun.

हे कामवर्षक इंद्र! सूर्य के समान तेजस्वि तुम्हारे हरि नामक घोड़े सोमपान के लिए तुम्हें यहां लावें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इमा धाना घृतस्नवो हरी इहोप वक्षतः. इन्द्रं सुखतमे रथे.. (२)

These grains, flowing with ghee, are brought here to please Indra, who will ride in his most comfortable chariot.

हरि नामक घोड़े सुख देने वाले रथ में यहां घी से युक्त धान्य के पास इंद्र को लावें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इन्द्रं प्रातःहवामह इन्द्रं प्रत्यक्ष्वरे. इन्द्रं सोमस्य पीतये.. (३)

We invoke Indra in the morning and at noon. We invoke Indra for the drinking of Soma.

मैं प्रत्येक यज्ञ में प्रातःकाल सोमपान के लिए इन्द्र को बुलाता हूं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
उप नः सुतमा गहि हरिभिरिन्द्र केशिभिः. सुते हि त्वा हवामह.. (४)

Come to us, Indra, with your tawny, flowing-maned horses, for we have poured the Soma for you.

हे इन्द्र! अपने लंबे बालों वाले घोड़ों की सहायता से हमारे सोम रस के समीप आओ.

Mandala 1 · Verse 5
सेमं नः स्तोममा गहुपेदं सवनं सुतम्. गौरों न तृषितः पिब.. (५)

O Indra, accept this praise and this pressed soma juice, and drink it like a thirsty cow.

हे इन्द्र! हमारे उस स्तोत्र को सुनकर यज्ञ के समीप आओ. सोम रस तैयार है. उसे ऐसे

Mandala 1 · Verse 6
इमे सोमास इन्दवः सुतासो अधि बर्हिषि. तो इन्द्र सहसे पिब.. (६)

These Soma juices, pressed and purified, are offered on the sacred grass. Drink them, O Indra, for your strength.

हे इन्द्र! यह पतला सोम रस बिछे हुए कुशों पर रखा है. इसे शक्ति बढ़ाने के लिए पियो.

Mandala 1 · Verse 7
अयं ते स्तोमो अग्रियो हृदिस्पृगस्तु शंतमः. अथा सोमं सुतं पिब.. (७)

May this foremost hymn, touching the heart, be most auspicious for you. Then, drink the pressed Soma.

हे इन्द्र! यह श्रेष्ठ स्तोत्र तुम्हारे लिए हृदयस्पर्शी एवं सुखदायक बने. उसके बाद तुम

Mandala 1 · Verse 8
विश्वमित्वसवनं सुतमिनद्रो मदय गच्छति. वृत्रहा सोमपीतये.. (८)

Indra, the slayer of Vritra, rejoices in drinking Soma, as the universe itself is his offering.

वृत्रनाशक इन्द्र प्रसन्नता प्राप्ति के निमित्त सोम रस पीने के लिए ऐसे सभी यज्ञों में जाते

Mandala 1 · Verse 9
सेमं नः काममा पणं गोभिरश्वैः. शतकतो. स्तवाम त्वा स्वाध्यः.. (९)

O hundred-skilled one, we praise you with cows and horses, so that our desires may be fulfilled.

हे शतक्रतु! गाएं और अश्व देकर हमारी सभी अभिलाषाएं पूरी करो. हम भली प्रकार

Mandala 1 · Verse 10
sa naḥ pāvaka dīdivo 'gne devām̐ ihā vaha | upa yajñaṁ haviś ca naḥ

Mandala 1 · Verse 11
sa naḥ stavāna ā bhara gāyatreṇa navīyasā | rayiṁ vīravatīm iṣam

Mandala 1 · Verse 12
agne śukreṇa śociṣā viśvābhir devahūtibhiḥ | imaṁ stomaṁ juṣasva naḥ

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्रावरुणयोर्हं सम्राजोराव वृणो. ता नो मृळात ईदृशे.. (१)

I invoke Indra and Varuna, the supreme rulers, that they may bestow their grace upon us.

मैं भली प्रकार प्रकाशमान इन्द्र और वरुण से अपनी रक्षा की याचना करता हूं. वे दोनों

Mandala 1 · Verse 2
गन्त्तारि हि स्थोऽवसे हवं विप्रस्य मावतः. धर्तारा चर्षणोनाम्.. (२)

You are the protector and sustainer of all beings, the one who comes to save us.

हे मनुष्यों के स्वामी इंद्र! मुझ पुरोहित की रक्षा के लिए मेरी पुकार सुनो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अनुकामं तर्पयेथामिन्द्रावरुण राय आ. ता वां नेदिष्ठमीमहे.. (३)

May we satisfy Indra and Varuna according to our desires, for they are the closest to us.

हे इंद्र और वरुण! हमारी अभिलाषा के अनुसार धन देकर हमें तृप्त करो. हम तुम्हारा सामीप्य चाहते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
युवाकु हि शचीनां युवाकु सुमतीनाम्. भूयाम वाजदावनाम्.. (४)

May we be blessed with strength and wisdom, and may we be givers of abundance.

हम बल और सुबुद्धि की इच्छा से तुम्हें चाहते हैं. हम श्रेष्ठ अन्नदाता हों. (४)

Mandala 1 · Verse 5
इन्द्रः सहसदाव्नां वरुणः शंस्यानाम्. क्रतुभर्वत्युक्थः.. (५)

Indra is the lord of strength, Varuna the lord of praise; the sacrifice is fulfilled by offerings.

सहस्रों धनदाताओं में इंद्र एवं स्तुति ग्रहणकर्ताओं में वरुण श्रेष्ठ हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तयोरिदवसा वयं सनेम नि च धीमहि. स्यादुत प्रेचनम्.. (६)

May we attain them and meditate upon them, and may they be our guiding light.

इंद्र और वरुण की रक्षा से हम धन प्राप्त करके उसका उपयोग करें. हमारे पास पर्याप्त धन हो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
इन्द्रावरुण वामहं हुवे चित्राय राधसे. अस्मान्स्तु जिग्युषस्कृतम्.. (७)

We invoke Indra and Varuna for glorious gifts and abundant wealth, that we may be victorious.

हे इंद्र और वरुण! विचित्र धनों को पाने के लिए मैं तुम्हें बुलाता हूं. तुम हमें भली-भांति विजय दिलाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
इन्द्रावरुण नु नु वां सिबासनन्तीषु धीवा. असमभ्यं शर्म यच्छतम्.. (८)

O Indra and Varuna, you who are the bestowers of strength and protection, grant us your abundant grace and shelter.

हे इंद्र और वरुण! हमारा मन तुम्हारी उत्तम सेवा का अभिलाषी है. तुम हमें सुख दो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
प्र वामश्रौतु सुश्रुतिरিন্দ्रावरुण यां हुवे. यामध्याये सधस्तुतिम्.. (९)

O Indra and Varuna, may our hearing be auspicious for the praise I invoke, the praise sung together in assembly.

हे इंद्र और वरुण! जिस स्तुति से हम तुम्हें बुलाते हैं और जिस शोभन स्तुति को तुम स्वीकार करते हो, हमारी वही सुंदर स्तुति तुम्हें प्राप्त हो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
आग्ना अग्‍न इह‍ावसे होत्रां यविष्ठ भारतीम्. वरुत्रीं धिषणं वह.. (१०)

O Agni, most youthful and powerful, come to protect us with your divine offerings and wisdom.

हे अग्नि! हमारी रक्षा के लिए देवपत्नियों को यहां ले आओ. हे अत्यंत युवा अग्नि! हमें ऐसी वाणी दो, जिससे हम देवों को बुला सकें एवं निषपूर्व सत्य भाषण कर सकें. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अभि नो देवीरक्सा महः शर्मणा नृपनी: अछिन्‍नपात्राः सचान्ताम्.. (११)

May the divine goddesses, with their protective power and regal grace, bestow upon us abundant prosperity and unbroken sustenance.

मनुष्यों का पालन करने वाली एवं शीघ्रगामिनी देवियां रक्षा एवं परम सुख देने के लिए हम पर प्रसन्न हों. (११)

Mandala 1 · Verse 12
इहेन्द्रानीमुप हव्ये वरुणानीं स्वस्तये. अग्‍नायीं सोमपीतये.. (१२)

Invoke Indrani for protection and Varunani for well-being, and Agneyi for the enjoyment of Soma.

हम अपने कल्याण के लिए एवं सोमपान करने के लिए इंद्रपत्नी, वरुणपत्नी एवं अग्निपत्नी को बुलाते हैं. (१२)

Mandala 1 · Verse 1
तीव्राः सोमास आ गहाशीर्वर्त्तन्तः सुता इमे. वायो तानप्रस्थितानिष.. (१)

Come, O Soma, with your intense powers, these pressed juices are here. O Vayu, accept these offerings.

हे वायु! यह तीखा और संतोष देने वाला सोमरस तैयार है. तुम आओ और लाए हुए सोमरस का पान करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
उभा देवा दिविस्पृशेन्द्रवायु हवामहे. अस्य सोमस्य पीतये.. (२)

We invoke Indra and Vayu, the twin gods who touch the heavens, for the drinking of this Soma.

मैं आकाश में रहने वाले इंद्र और वायु दोनों देवों को यह सोमरस पीने के लिए बुलाता हूँ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इन्द्रवायु मनोऽजुवा विप्रा हवन्त ऊतये. सहसाक्षा धियस्पती.. (३)

The wise invoke Indra and Vayu for protection and strength, the lords of intellect and power.

वायु मन के समान गतिशील एवं इंद्र हजार आँखों वाले हैं. बुद्धिमान् लोग इन्हें अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
मित्रं वर्य हवामहे वरुणों सोमपीतये. जज्ञाना पूतदक्षसा.. (४)

We invoke Mitra and Varuna, who have drunk Soma, for the sacrifice. They are born with pure power.

मित्र और वरुण यज्ञ में प्रकट होने वाले एवं शुद्धबलसंपन्न हैं. हम उन्हें सोमरस पीने के लिए बुलाते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
ऋतेन यावृतृधावृत्तस्य ज्योतिषस्पती. ता मित्रावरुणा हुवे.. (५)

I invoke Mitra and Varuna, the lords of the celestial light, who uphold the cosmic order and are sustained by truth.

मित्र और वरुण सत्य के द्वारा यज्ञकर्म की वृद्धि करते हैं. और वास्तविक प्रकाश के पालनकर्ता हैं. मैं इन दोनों का आह्वान करता हूं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
वरुणः प्राविता भुवनमित्रो विश्वाभिरूतिभिः. करर्ता नः सुराधसः.. (६)

May Varuna, the protector and friend of all worlds, bestow upon us abundant prosperity and sustenance.

वरुण और मित्र सभी प्रकार से हमारी रक्षा करते हैं. वे हमें पर्याप्त संपत्ति दें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
मरुत्वन्तं हवामह इन्द्रमा सोमपीतये. सजूर्णेण तृम्प् तु.. (७)

We invoke Indra, the thunder-wielding, for the drinking of Soma. May he be pleased and satisfied, dwelling with us.

हम सोम Aynı पीने के लिए मरुद्गण के साथ इंद्र का आह्वान करते हैं. वे इंद्र मरुद्गणों के साथ तृप्त हों. (७)

Mandala 1 · Verse 8
इन्द्रज्येष्ठा मरुदगणा देवाः पुष्परात्यः. विश्वे मम श्रुता हवम्.. (८)

The Maruts, led by Indra, are the divine hosts, the bestowers of flowers. All the gods have heard my invocation.

हे मरुद्गणो! तुम लोगों में इंद्र सबसे महान हैं. पुषा नाम के देव तुम्हारे दाता हैं. आप सब हमारा आह्वान सुनें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
हत् वृत्रं सुदानव इन्द्रण सहसा युजा. मा नो दुःशंश ईशत.. (९)

Indra, the generous, with forceful might, slew Vritra. May no evil spirit have dominion over us.

हे शोभन एवं दानशील मरुद्गणो! बलवान् एवं योग्य इंद्र की सहायता से तुम शत्रु का विनाश करो. वह दुष्ट शत्रु हमारा स्वामी न हो जाए. (९)

Mandala 1 · Verse 10
विश्वा-न्-देवा-न्-वामहे मरुतः सोमपीतये. उग्रा हि ष्पृश्णिमातरः.. (१०)

We invoke all the gods, the Maruts, for the drinking of Soma. For they are fierce, the mothers of the swift.

हम सोम Aynı पीने के लिए संपूर्ण मरुत्देवों को बुलाते हैं. वे पृश्णि अर्थात् पृथ्वी की संतान हैं और उनके बल को शत्रु सहन नहीं कर सकता. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
जयतामिव तन्वतंरुतामेति धृष्णुया. यच्छुम्भं याथना नरः.. (११)

May the mighty one, who bestows strength, triumph and expand, just as a person overcomes obstacles.

विजयी लोग जिस प्रकार हर्षनाद करते हैं, उसी प्रकार हे शोभन यज्ञ में आने वाले मरुद्गणो! आप भी दर्प के साथ गर्जन करते हो. (११)

Mandala 1 · Verse 12
हस्काराद्दिद्युत्स्पर्शतो जाता अवन्तु नः. मरुतो मूल्यन्तु नः.. (१२)

May the Maruts, born from the sound of 'ha' and the touch of lightning, protect us and be our wealth.

चमकने वाली विद्युत से उत्पन्न मरुद्गण हमारी रक्षा करें और हमारे सुख बढ़ावें. (१२)

कस्य नूनं कतमस्यामृतांनां मनामहे चारु देवस्य नाम. को नो म hafAditye पुनर्दार्तिपरं च दृशयें मातरं च.. (१)

Whose name shall we praise, the beautiful name of the immortal gods? Who will grant us again the sight of the radiant Aditya and the Mother?

मैं देवताओं में से किस श्रेणी के किस देवता का सुंदर नाम पुकारूं? कौन देवता मुझे मरने वाले को विशाल धरती पर रहने देगा? जिससे मैं अपने माता-पिता को देख सकूं? (१)

Mandala 1 · Verse 2
अग्नेर्वयं प्रथमस्यामृतांनां मनामहे चारु देवस्य नाम. स नो म hafAditye पुनर्दार्तिपरं च दृशयें मातरं च.. (२)

We praise the beautiful name of Agni, the first of the immortals. May he grant us further vision in the sun and show us our mother.

मैं देवताओं में सबसे पहले अग्नि का नाम पुकारता हूं. वे मुझे इस विशाल धरती पर रहने देंगे, जिससे मैं अपने माता-पिता को देख सकूं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अभि त्वा देव सवितरिशानं वार्याणाम्. सदावन्भागमीमहे.. (३)

O Divine Savitr, we seek from you, the bestower of all desirable things, a portion of your abundant blessings.

हे सदा रक्षा करने वाले सूर्य देव! तुम उत्तम धन के स्वामी हो, इसलिए मैं तुमसे उपभोग करने योग्य धन मांगता हूं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यश्चिद्धि त इत्था भगः शशमानः पुरा निदः. अद्देभो हस्तयोर्दधे.. (४)

He who, with a desire for glory, held this great power in his hands before the waters.

हे सूर्य! तुम अपने दोनों हाथों में उपभोग के योग्य धन को धारण करते हो. वह सबके द्वारा प्रशंसित है. उससे कोई द्वेष नहीं रखता. (४)

Mandala 1 · Verse 5
भगभक्तस्य ते वयमुदशेन तवावसा. मूर्धानं राय आरभे.. (५)

We, your devotees, with your grace, have begun to reach the crown of prosperity.

हे सूर्य देव! तुम धन के स्वामी हो. यदि तुम रक्षा करो तो हम धन की उन्नति करने में लग जावें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
नहि ते क्षत्रं न सहो न मन्युं वयश्ननामि पतयन्त आपुः. नेमा आपो अनभिषं चरन्तीं ये वातस्य प्रमिनन्यभ्.. (६)

The Kshatriya's strength, power, and wrath do not perish when they fall; nor does the water, when it flows, fail to reach the one who is parched by the wind.

हे वरुण देव! आकाश में उड़ने वाले पक्षियों में भी तुम्हारे समान शक्ति और पराक्रम नहीं हैं. इन्हें तुम्हारे बराबर क्रोध भी नहीं मिला है. सर्वदा चलने वाली वायु और बहने वाला जल तुम्हारी गति से आगे नहीं बढ़ सकता. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अबुधने राजा वरुणो वनस्योर्ध्वं स्तूपं ददते पूतदक्षः. नीचीनाः स्थूपरि बुधन एषामस्मे अन्तर्निहिताः केतवः स्युः.. (७)

The wise king Varuna, the protector of the forest, bestows a lofty structure, pure and powerful. Within this structure, the wisdom of these beings is hidden, and their guiding lights reside within us.

शुद्ध बल के स्वामी वरुण मूलरहित आकाश में ठहर कर उत्तम तेज के समूह को ऊपर ही ऊपर धारण करते हैं. उस तेजसमूह की किरणों का मुख नीचे और जड़े ऊपर हैं. उन्हीं के कारण हममें प्राण स्थित रहते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
उरुं हि राजा वरुणश्रृकारं सूर्योय पन्यामचेतवा उ. अपदे पादा प्रतिधात्वेऽकरुतापवक्ता हृदयाविश्रि.. (८)

King Varuna has made a vast path, the sun has illuminated it. The feet have been placed where there are no feet, and the heart has been opened to the speaker.

राजा वरुण ने सूर्य के उदय से अस्त तक चलने के लिए मार्ग का विस्तार किया है, उसने आकाश में बिना पैरों वाले सूर्य के चलने के लिए मार्ग बनाया है. वे मेरे हृदय का भेदन करने वाले शत्रु का नाश करें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
शंतं ते राजन्निभषजः सहस्रमूर्वी गभीरा सुमतिष्ठे अस्तु. बाधस्व दूरे निर्ऋतिं पराचैः कृते चिदनेः प्र मुमुग्ध्यस्मत्.. (९)

May your thousand healing powers, O King, be vast, deep, and well-established. Drive away misfortune far from us, and liberate us from all bonds.

हे राजा वरुण! आपकी औषधियां सैकड़ों-हजारों हैं. आपकी उत्तम बुद्धि विस्तृत और गंभीर हो. तुम हमारा अनिष्ट करने वाले पापों को हमसे दूर रखो. हमने जो पाप किए हैं, उन्हें नष्ट कर दो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अमी य ऋक्षा निहितास उच्चा नक्तं दृशे कुछ चिदिदेयुः. अदब्धानि वरुणस्य व्रतानि विचाकशचन्द्रमा नक्तमेति.. (१०)

The stars, fixed high above, are visible at night. The unbreakable laws of Varuna are manifest, and the moon shines forth in the darkness.

ऊँचे आकाश में जो सप्तर्षि नामक तारे स्थित हैं, वे रात में दिखाई देते हैं, पर दिन में कहां चले जाते हैं? वरुण देव के कार्यों में कोई बाधा नहीं डाल सकता. वरुण की आज्ञा से ही रात में चंद्रमा प्रकाशित होता है. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अतो विश्वाभ्यःदृढ चिकित्वों अभि पश्यति. कृतानि या च कर्वी.. (११)

He who is wise and discerning sees all that has been created and all that is yet to be created.

बुद्धिमान् मनुष्य वरुण की अनुकंपा से वर्तमान काल और भविष्यत् काल की सारी आश्चर्यजनक घटनाओं को देख लेते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
स नो विश्वाஹா सुकृतुRaditya:Supatha करतृ. प्र ण आयुषि तारिषत्.. (१२)

May the radiant Sun, the doer of good deeds, guide us on the right path, bestowing long life and prosperity.

शोभन बुद्धि वाले वे ही अदितिपुत्र वरुण हमें सदा उत्तम मार्ग पर चलने वाला बनावें एवं हमारी आयु को बढ़ावें. (१२)

Mandala 1 · Verse 1
वसिष्वा हि मियेष्य वस्त्राण्यूर्जां पते. सेमं नो अध्वरं यज.. (१)

O Lord of energy, adorn yourself with garments, and accept this sacrifice of ours.

हे अग्नि देव! तुम यज्ञ के योग्य एवं अन्नो के पालक हो. तुम अपना तेज धारण करो और हमारे इस यज्ञ को पूरा करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
नि नो होता वरेण्यः सदा यविष्ठ मन्मभिः. अग्ने दिवित्मता वाचः.. (२)

O Agni, the most worthy priest, ever youthful, accept our hymns and praises.

हे अग्नि! तुम सदा युवा, कमनीय एवं तेजस्वी हो. हम यज्ञ संपन्न करने वाले एवं ज्ञानपूर्ण वाक्यों से तुम्हारी स्तुति कर रहे हैं. तुम यहा बैठो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
आ हि ष्मा सूनवे पितापित्र्यजत्यापये. सखा सख्ये वरेण्यः.. (३)

As a father for his son, and a friend for his friend, the Supreme Being, worthy of worship, comes to protect.

हे श्रेष्ठ अग्नि! जिस प्रकार पिता पुत्र को, भाई भाई को और मित्र मित्र को अभीष्ट वस्तुएं देता है, उसी प्रकार तुम भी मुझे इच्छित वस्तुएं दो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
आ नो वही रिशादसो वरुणो मित्रो अर्यमा. सीदन्तु मनुषो यथा.. (४)

May Varuna, Mitra, and Aryama, who are protectors and destroyers of evil, be seated among us, just as they are among men.

हे अग्नि देव! शत्रुओं का नाश करने वाले मित्र, वरुण और अर्यमा जिस प्रकार मनु के यज्ञ में आए थे, उसी प्रकार तुम भी हमारे यज्ञ में बिछे हुए कुशों पर बैठो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
पूर्व होतरस्य नो मन्दस्व सखस्य च. इमा उ ष् ु श्रुधी गिरः.. (५)

Hear these hymns, O Indra, our friend and our most excellent priest, and be pleased with them.

जाओ. हमारे इन स्तुति-वचनों को सुनो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
यच्चिच्छ्रद्धा तना देवदेवं यजामहे. त्वे इदृश्यते हविः.. (६)

We worship the divine, the Lord of Lords, with faith and devotion, for in You alone is the offering perceived.

जिस श्रद्धा से हम देवों के देव की स्तुति करते हैं, उस हवि को तुम देखते हो।

Mandala 1 · Verse 7
प्रियो नो अस्तु विशपतिर्होता मन्द्रो वरेण्यः. प्रियाः स्वग्नयो वयम्.. (७)

May the divine priest, the bestower of boons, be dear to us. May we too be dear to the sacred fires.

प्रिय, नित्य, विशपतियों में श्रेष्ठ, मन्द्र, वरेण्य, अग्नि हमारे प्रिय हों. हम भी प्रिय हों।

Mandala 1 · Verse 8
स्वग्नयो हि वार्यं देवासो दधिरं च नः. स्वग्नयो मनामहे.. (८)

The gods have bestowed upon us the power to protect ourselves, and we shall indeed protect ourselves.

हम शोभन अग्नि को वार्य (श्रेष्ठ) मानते हैं, और वे हमें धारण करते हैं।

Mandala 1 · Verse 9
अथा न उभयेषाममृतं मर्त्यानाम्. मिथः सन्तु प्रशस्तयः.. (९)

May both the immortal gods and mortal humans be praised together. Let there be mutual praise among them.

अब मनुष्यों के लिए अमृत और हमारे लिए भी स्तुतियाँ परस्पर हों।

Mandala 1 · Verse 1
अग्ं न त्वा वारवन्त्ं वन्दध्या अग्निं नमोभिः. सम्राजन्तमध्वराणाम्.. (१)

We worship you, Agni, the radiant and powerful, the sovereign of sacrifices, with our salutations.

हे अग्नि देव! तुम यज्ञ के सम्राट एवं पूंछ वाले घोड़े के समान हो. हम स्तुतियों के द्वारा तुम्हारी वंदना करते हैं।

Mandala 1 · Verse 2
स घा नः सूनुः शवसा पृथुप्रगामा सुशेवः. मीढ्वां अस्माकं बभूयात्.. (२)

May He, our son, mighty and far-reaching, be a benevolent protector for us.

हे अग्नि! तुम शक्ति के पुत्र और शीघ्र गमन करने वाले हो, वे हमारे ऊपर प्रसन्न होकर हमें सुख दें और हमारी अभिलाषाओं की वर्षा करें।

Mandala 1 · Verse 3
स नो दूराच्चासव्श्च नि मर्त्यदधायोः. पाहि सदमिद्धिश्वायूः.. (३)

Protect us, O Lord, from afar and near, from all evil, and sustain us always with Your divine grace.

हे अग्नि! तुम सर्वत्र गमन करने में समर्थ हो. तुम हमारा अनिष्ट करने वाले पापाचारी

Mandala 1 · Verse 4
इमम्‌ त्वस्माकं सनिं गायत्रं नव्यांसम्, अग्ने देवेषु प्र वोचः.. (४)

O Agni, proclaim this new hymn, our offering, to the gods.

हे अग्नि! इस यज्ञ में उपस्थित हवि और नवीनतम् गायत्री छंद में रचित स्तोत्र के विषय में देवों को बताना. (४)

Mandala 1 · Verse 5
आ नो भज परमेष्वा वाजेषु मध्यमेषु, शिक्षा वस्वो अन्तमस्य.. (५)

Grant us a share in the highest and middlemost powers, and teach us the ultimate wealth.

हे अग्नि! हमें दिव्यलोक तथा अंतरिक्षलोक का अन्न सब ओर से प्राप्त कराओ. तुम हमें भूलोक संबंधी धन भी प्रदान करो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
विभक्तासि चित्रभानो सिन्धोरूमा उपाक आ. सधो दाशुषे क्षारसि.. (६)

O brilliant Agni, you are divided and spread across the waters, and you are pleased with the offerings of the sacrificer.

हे विलक्षण प्रकाश वाले अग्नि देव! जिस प्रकार सिंधु की लहरें जल को सभी पर्वतों, नालियों आदि में भर देती हैं, उसी प्रकार तुम भी लोगों में धन का विभाग करने वाले हो. द्रव्य देने वाले यजमान को तुम कर्म का फल शीघ्र दो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
यमने पृत्सु मर्त्यमवा वाजेषु यं जुनाः, स यन्ता शश्रुतीरिशः.. (७)

He who is the controller in battles and the bestower of strength in assemblies, He is the supreme ruler, the hearer of prayers.

हे अग्नि देव! युद्धक्षेत्र में तुम जिस मनुष्य की रक्षा करते हो और तुम्हारी प्रेरणा से जो युद्धक्षेत्र में जाता है, वह नित्य ही अन्न प्राप्त करता रहेगा. (७)

Mandala 1 · Verse 8
नकिरस्य सहन्तय पर्याता कयस्य चित्, वाजो अस्ति भवायः.. (८)

No one can bear His strength, for He is the source of all existence.

हे अग्नि देव! तुम शत्रुओं का दमन करने वाले हो. तुम्हारे भक्त यजमान पर कोई आक्रमण नहीं कर सकता, क्योंकि उसके पास विशेष प्रकार की शक्ति है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
स वाजं विश्वचर्षणिरर्द्धिरस्तु, तरुता विप्रभिरस्तु सनिता.. (९)

May that which is all-pervading and nourishes all beings be our sustenance, and may the wise ones grant us abundance.

सारे मनुष्य अग्नि की पूजा करते हैं. उसने घोड़ों की सहायता से हमें युद्ध में सफलता दििलाई है. वह बुद्धिमान् ऋत्विजों को यजकर्म का फल देने वाला हो. (९)

Mandala 1 · Verse 1
यत्र ग्रावा पृथुबुध्न ऊर्ध्वं भवति सोतवे. उलूखलसुतानामवेदिन्द्र जलGul:.. (१)

Where the broad-based stone is raised for grinding, O Indra, there the pressing-stones are found.

हे इन्द्र! जिस यज्ञ में सोम रस निचोड़ने के लिए भारी जड़ वाला पत्थर उठाया जाता है और ओखली की सहायता से सोम रस तैयार किया जाता है, वहां सोम रस अपना जानकर पिओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यत्र द्रावि जघनधिषवण्या कृता. उलूखलसुतानामवेदिन्द्र जलGul:.. (२)

Where the mortar and pestle are used, there the sons of the mortar are known, O Indra.

हे इन्द्र! जिस यज्ञ में सोमरस को निचोड़ने के लिए दोनों फलक जाँघों के समान फैल गए हैं, उसी यज्ञ में ओखली द्वारा तैयार किया हुआ सोम रस अपना जानकर पिओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
यत्र नार्पचव्यमुपच्यं च शिखते. उलूखलसुतानामवेदिन्द्र जलGul:.. (३)

Where there is no need for accumulation or expenditure, Indra, the lord of the gods, rejoices in the simple dwelling of the mortar.

हे इन्द्र! जिस यज्ञ में यजमान की पत्तियां भीतर घुसती और बाहर निकलती रहती हैं, उसी यज्ञ में ओखली द्वारा तैयार किया हुआ सोम रस अपना जानकर पिओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यत्र मन्थां विबध्नते रश्मीन्त्यमितवा इव. उलूखलसुतानामवेदिन्द्र जलGul:.. (४)

Where the rays of the sun are bound like ropes, Indra, you are the lord of the sky.

हे इन्द्र! जिस यज्ञ में सोमरस मंथन करने का दंड घोड़े की लगाम के समान बांधा जाता है, उसी यज्ञ में ओखली द्वारा तैयार किया हुआ सोम रस अपना जानकर पिओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
समिन्र्द गर्दभं मृण नुवन्तं पापयामुया. आ तू न इन्द्र संस्य गोष्वेषु शुष्मिएु सहसेषु तुवीमघ.. (५)

O Indra, the giver of strength, may you come to us with your abundant wealth, protecting our cattle and our possessions.

Mandala 1 · Verse 6
पताति कुण्डण्णाच्या दूरं वातो वनादधि. आ तू न इन्द्र संस्य गोष्वेषु शुष्मिएु सहसेषु तुवीमघ.. (६)

The wind blows far from the forest, O Indra, come to us with your mighty strength and abundant wealth, to our cattle and our heroes.

Mandala 1 · Verse 7
सर्वं परिक्रोशं जहि जम्भया कृकदाश्वम्. आ तू न इन्द्र संस्य गोष्वेषु शुष्मिएु सहसेषु तुवीमघ.. (७)

Conquer all reproach and the roaring foe. Come to us, Indra, with strength in cattle, wealth, and might.

तुम हमारे प्रति क्रोश करने वालों का नाश करो, हमारी हिंसा करने वालों को मार डालो. हे अनंत धनशाली इन्द्र! हमें सुन्दर और अगणित गायों तथा अओं द्वारा उत्तम धनवान् बनाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
आ घा गमद्धि श्रवत्सहस्रिणभिरूतिभिः. वाजेभिरूप नो हवम्.. (८)

May the all-pervading, all-hearing divine presence, with countless powers and boons, come to our invocation.

इंद्र यदि हमारी पुकार सुनेंगे तो यह निश्चय है कि वे हजारों पालनशक्तियों एवं अस्त्रों के साथ हमारे निकट आवेंगे. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अनु प्रत्यस्यौकसो हुवे तुविप्रतिं नरम्. यं ते पूर्व पिता हुवे.. (९)

I invoke you, O powerful and heroic one, as your father invoked you before.

Mandala 1 · Verse 1
prati tyaṁ cārum adhvaraṁ gopīthāya pra hūyase | marudbhir agna ā gahi

I call them from their ancient abode in heaven, as Indra calls the sacrificers, just as my father also called them before.

इन्द्रं बहुतां यजमानां के पास जाते हैं, मैं उनके प्राचीन निवासस्थान स्वर्ग से उन्हें बुलाता हूं, इससे पूर्व मेरे पिता भी उन्हें बुला चुके हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
विभुर्विश्वभ्रमै भुनय मेधिरो द्विमाता शयुः कतिधा चिदाये.. (२)

The omnipresent Lord, who sustains the universe, is the source of all knowledge and the protector of all beings. He is the one who is born in many ways, yet remains unborn.

हे अग्नि! तुम अंगिरा गोत्र वाले ऋषियों में प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ हो. तुम बुद्धिमान् हो और देवों के यज्ञों को सुशोभित करते हो. तुम सारे संसार पर अनुग्रह के लिए अनेक रूप से व्याप्त हो. तुम मेधावी एवं दो लकड़ियों से उत्पन्न हो. मनुष्यों का कल्याण करने के लिए तुम भिन्न-भिन्न रूपों में सब जगह रहते हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्वमग्ने प्रथमो मातरिश्वन आविर्भाव सुकृतया विवस्वते. अरेजेतां रोदसी होतृवर्यसृच्नोभर्मयजो महो वसो.. (३)

O Agni, firstborn of Matarishvan, you manifested with great power for Vivashvan. The heavens and earth trembled at your brilliance, the divine offering, and your immense glory.

हे अग्नि! तुम वायु की अपेक्षा प्रमुख हो और यजमान के निकट सुंदर यज्ञ को पूर्ण करने की इच्छा से प्रकट हो जाओ. तुम्हारी सामर्थ्य देखकर धरती और आकाश कांप उठते हैं. तुमने श्रेष्ठ होता के रूप में यज्ञ का कार्य स्वीकार किया है. तुम्हारे यज्ञ में निवास के कारण पूज्य देवताओं के यज्ञ पूर्ण हुए हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
त्वमग्ने मानवशायः पुरुषरक्से सुकृते सुकृत्तरः. शत्रोण यत्पिब्रोभ्यस्यं पर्या त्वा पूर्वमनयज्ञायै पुनः.. (४)

O Agni, you are the protector of humanity, the bestower of good deeds. You are the one who drinks the offerings, and we bring you back to the altar for the sacrifice.

हे अग्नि! तुमने मनु पर अनुग्रह करके यह बताया था कि किन कर्मों से स्वर्ग मिलता है. तुमने अपने सेवक पुरुषरवा को शोभन फल दिया. दोनों काष्ठ तुम्हारे माता-पिता हैं. उनके घर्षण से तुम उत्पन्न होते हो. ऋत्विज तुम्हें पहले वेदी के पूर्व भाग में ले जाते हैं, बाद में पश्चिम भाग में. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वमग्ने वृषभः पुष्टिवर्धन उ Dadurchसुचे भवांसि श्रवाव्यः. य आहुतिं परि वेदा वष्टकृतिमकायुरग्रे विश आविवसि.. (५)

You, O Agni, are the powerful bull, the sustainer of nourishment, the bestower of glory. You, who know the offerings and their forms, enter the homes of all beings.

हे अग्नि! तुम अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाले हो एवं यजमान को धन आदि से पुष्ट करते हो. हे एकमात्र अन्नदाता! जो यजमान यज्ञपात्र उठाते हुए तुम्हारा यश गाता है एवं वृष्ट्कार शब्द के साथ तुम्हें आहुति देता है, तुम उसे पहले प्रकाश देते हो, उसके बाद सारे संसार को. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वमग्ने वृजिनवर्तिन नरं सवन्मनपिषं विविधे विचर्षणे. यः शूरसाता परितक्म्यं धने भभिभ्रित्समृतं हसि भयूयसः.. (६)

O Agni, you who are all-seeing and pervade all, you protect the man who offers you pure Soma, and you increase his wealth and strength.

हे विशिष्ट ज्ञानसंपन्न अग्नि! तुम सदाचारहीन मनुष्य को ऐसे काम में लगाते हो, जिससे उसका उद्धार हो सके. जब विस्तृत युद्ध चारों ओर भली-भांति आरंभ हो जाता है तो तुम्हारी कृपा से थोड़ी संख्या वाले एवं वीरताशून्य लोग बड़े-बड़े वीरों का वध कर डालते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
त्वं तमग्ने अमृतत्व उत्तमे मर्त्त दधासि श्रवसे दिवेदिदेव. यस्तात्ृाण उभयाय जन्मने मयः कृणोषि प्रय आ च सूर्य.. (७)

O Agni, you bestow immortality and supreme glory upon mortals, and you bring forth joy for both worlds, shining like the sun.

हे अग्नि! जो मनुष्य तुम्हारी सेवा करता है, उसके लिए तुम अन्न प्रदान करने हेतु उत्तम और स्थायी पद पर प्रतिष्ठित कर देते हो। जो यजमान मनुष्यों एवं पशुओं को प्राप्त करने के लिए अत्यंत उत्सुक है, उस बुद्धिमान् यजमान को तुम सुख और अन्न दो। (७)

Mandala 1 · Verse 8
त्वं नो अग्ने सनये धNASAं यशसँ कारुँ कृणुहि स्तवानः। ऋद्ध्याम कर्मार्पसा नवेन देवैर्धावापृथिवी प्रावतं नः.. (८)

O Agni, praised by us, make us prosperous and glorious. May the gods, heaven and earth, protect us with new strength and deeds.

हे अग्नि! हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हमें धन एवं यश देने वाला तथा यजकर्म करने वाला पुत्र प्रदान करो. तुम्हारे द्वारा दिए गए नवीन पुत्र से हम पराक्रम में उन्नति करेंगे. हे धरती और आकाश! तुम अन्य देवों के साथ मिलकर हमारी ठीक से रक्षा करो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्वं नो अग्ने पितृरूपस्थ आ देवो देवेष्वनवध जागुवि. तन्नृदृद्धिंPromitish कारवे त्वं कल्याणं वसु विश्वमोषिषे.. (९)

O Agni, divine and ever-vigilant among gods, you are like a father to us. You bestow prosperity and possess all wealth, granting us strength and well-being.

हे दोपरहित अग्नि! तुम सब देवों की अपेक्षा जागरूक हो. तुम अपने माता-पिता धरती-आकाश के पास रहकर अनुग्रह के रूप में हमें पुत्र दो एवं यजकर्ता यजमान के प्रति प्रसन्नचित्त रहो. हे कल्याणकारक! तुम यजमान के लिए सभी प्रकार की संपत्ति प्रदान करो. (९)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्रस्य नु वीर्याणि प्र वोचं यानि चकार प्रथमानि वजी. अहन्न्हिमवपस्ततर्द प्र वक्षणा अभिनत्त्यर्वतानाम्.. (१)

I shall declare the mighty deeds of Indra, the first ones performed by the Vritra-slayer. He struck down the serpent, split open the waters, and shattered the mountains.

मैं वज्रधारी इंद्र के पूर्वकृत पराक्रमों का वर्णन करता हूं. उसने मेघ का वध किया. इसके पश्चात् जलों को धरती पर गिराया. इसके बाद बहती हुई पहाड़ी नदियों का मार्ग बदल दिया. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अहन्न्हिं पर्वते शिख्रिणार्ण त्वष्टस्मे वज्रं स्वयं ततक्ष. वाश्वा इव धेनवः स्यन्दमाना अज्जः समुद्रमव जगमुरापः.. (२)

The sun, like a mountain peak, forged the thunderbolt for Indra. The waters, like cows, flowed down to the ocean.

इंद्र ने पर्वत पर आश्रय लेने वाले मेघ का वध किया. त्वष्टा ने इंद्र के लिए भली प्रकार फेंका जाने वाला वज्र बनाया. इसके बाद जल की वेगवती धाराएँ उसी प्रकार समुद्र की ओर गईं थीं, जिस प्रकार रंभाती हुई गाएं बछड़ों वाले घर की ओर जाती हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वृषायमाणोऽवृणीत सोमं त्रिकद्रुकेष्वपिबत्सुतस्य. आ सायंकं मघवादनं वज्रमहनेनं प्रथमजामहीनाम्.. (३)

The mighty Indra, desiring strength, chose Soma and drank it in the three sacred places. With his thunderbolt, he then slew the serpent Vritra, the firstborn of the Ahi.

इंद्र ने बैल के समान तेजी से सोम ग्रहण किया. ज्योतिष्टोम, गोमेध और आयु इन विविध यज्ञों में चुआया हुआ सोमरस इंद्र ने पिया. धन के स्वामी इंद्र ने वज्ररूपी बाण ग्रहण करके सर्वप्रथम उत्पन्न मेघ का वध किया था. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यदिन्द्रप्रथमतृजांहीनाना-मायिनमिनाः प्रोत मायाः. आत्सूयं जनयन्द्यामुषासं तादीला शत्रुं न किला विविते.. (४)

The mighty Indra, who first slew the Vritra, the deluder, the enemy of the gods, brought forth the dawn and the sun, and thus never found a foe.

हे इंद्र! जब तुमने प्रथम उत्पन्न मेघ का वध किया था, तभी मायाधारियों की माया भी समाप्त कर दी थी. इसके पश्चात् तुमने सूर्य, आकाश एवं उषा को प्रकाशित किया था. इसके बाद तुम्हारा कोई शत्रु दिखाई नहीं दिया. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अहन्न् वृत्रं व्यसमिन्द्रो वज्रेण महता वधेन. स्कन्धासीव कुलिंशेना विवृक्णाऽहिः शयत उपपृक्पृथिव्याः.. (५)

Indra, with his great thunderbolt, slew Vritra. The serpent, cut down like branches by an axe, lies prostrate on the earth.

इन्द्र ने संसार में अंधकार फैलाने वाले शत्रु को महाविनाशकारी वज्र द्वारा हाथ काटकर मारा था, जिस प्रकार कुल्हाड़ी से काटी हुई शाखा गिर पड़ती है, उसी प्रकार वृत्र धरती पर सोया हुआ था. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अयोद्धेव दुर्मदं आ हि जुझे महावीर्ं तुविबाधमृजीषम्, नातादीदृस्य स्मृतिं वर्धानां सं रुजानाः पिपिष इन्द्रशत्रुः.. (६)

The mighty Indra, like an unconquerable fortress, has been invoked to battle, a powerful warrior who crushes all opposition. His strength, ever-increasing, is like a grinding stone that pulverizes enemies, leaving them utterly defeated.

अहंकारी वृत्र ने यह समझकर इन्द्र को ललकारा कि मेरे समान कोई योद्धा है ही नहीं. इन्द्र महान् पराक्रमी, बहुतों का ध्वंस करने वाले एवं शत्रुविजायी हैं. वृत्र इन्द्र के विनाश से बच नहीं सका. इन्द्र के शत्रु वृत्र ने गिरते समय नदियों के किनारे भी नष्ट कर दिए. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अपाहस्तौ अपृतन्यदिन्द्रमास्य वज्रमधि सानौ जघान. वृष्णो वभिः प्रतिमानं बुभुभ्ष्पुरुत्रा अस्ययद्व्यस्तः.. (७)

When Indra, with his thunderbolt, struck the chest of the unresisting and unresisting foe, the mighty ones, seeking to rival him, were scattered in many directions.

बिना हाथपैर वाले वृत्र ने इन्द्र को युद्ध में ललकारा. इन्द्र ने पहाड़ की चोटी के समान वृत्र के पृष्ठ कंठ में वज्र मारा. जिस प्रकार शक्तिशाली पुरुष की समानता करने वाले बलहीन व्यक्ति का प्रयत्न व्यर्थ जाता है, वही दशा वृत्र की हुई. वह कई जगह घायल होकर धरती पर गिर पड़ा. (७)

Mandala 1 · Verse 8
नदं न भिन्नममुया शयानं मनो रुहाणा अति यन्त्यापः. याश्चिद् वृत्रो महिमा पर्यतिष्ठतासामहिः पत्सुतः शीर्षभूव.. (८)

The waters, not broken, flowing over the sleeping mind, surpass it. The greatness of Vritra, which encompassed them, was overcome by the son of the earth.

सुंदर जल धरती पर पड़े हुए वृत्र को लांघकर उसी प्रकार आगे जा रहा है, जिस प्रकार सरिता टूटे हुए किनारों को पार करके बहती है. वह जीवित अवस्था में अपनी शक्ति से जिस जल को रोके हुए था, इस समय वह उसी जल के नीचे सो गया है. (८)

Mandala 1 · Verse 1
त्रिशिष्नो अथा भवतं नवेदसा विभुर्वा याम उत रातिरश्रिन्ना. युवोहि यन्त्रं हिभ्येव वासोऽभ्यायसेन्यां भवतं मनीषिभिः.. (१)

May you two, ever new and powerful, become the bestowers of gifts, the source of sustenance, and the object of praise for the wise.

हे बुद्धिमान् अश्विनीकुमारो! तुम हमारे लिए आज तीन बार आओ. तुम्हारे रथ और दान व्यापक हैं. जिस प्रकार रश्मियों वाला सूर्य शीतल रात्रि से संबंधित है, उसी प्रकार तुम दोनों का भी नियमित संबंध है. तुम कृपा करके विद्वानों के वश में हो जाओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
आ कृष्ण्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च. हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्.. (२)

The divine Sun, with golden chariot, moves through the worlds, beholding all, and by His radiant energy, He sustains both the immortal and the mortal.

आ कृष्ण के तेज से वर्तमान, अमृत और नश्वर को स्थापित करते हुए, हिरण्यमय रथ पर आरूढ़ सूर्य देव भुवनों को देखते हुए जाते हैं। (२)

Mandala 1 · Verse 3
याति देवः प्रवता यात्युद्गता याति शुभाभ्यां यजतो हरिभ्याम्. आ देवो याति सविता परावतोऽप विश्वं दुरिता बाधमानः.. (३)

The divine Sun, the sustainer, travels through the lowlands and highlands, and with auspicious rays, he dispels all darkness and evil.

देवता प्रवता (नीचे की ओर) जाते हैं, उद्गता (ऊपर की ओर) जाते हैं, शुभ (सफेद) और हरिभ्याम् (हरे) घोड़ों से यजन करते हुए जाते हैं। सविता देव दूर से आते हैं और सभी दुःखों को दूर करते हैं। (३)

Mandala 1 · Verse 4
अभिभूतं कृशनेर्विश्वरूपं हिरण्यशमं यजतो बृहन्तम्. आस्थाइद्रथं सविता चित्रभानुः कृष्णां रजसि तविषं दधानः.. (४)

The radiant Sun, the source of all, adorned with diverse splendors, sustains the vast universe, illuminating it with golden light.

अभिभूत (सबको वश में करने वाले), कृशने (सबको भस्म करने वाले), विश्वरूप (सब रूपों वाले), हिरण्यशम (स्वर्ण से युक्त), बृहन्तम् (महान) यजन करते हुए, चित्रभानु (अनेक किरणों वाले) सविता देव, कृष्णां रजसि (अंधकारमय रात्रि में) तविषं (बल) धारण करते हुए, रथ पर आरूढ़ होते हैं। (४)

Mandala 1 · Verse 5
वि जनाड्यावाः शितिपादो अख्यन्त्रं हिरण्यप्रशुं वहन्त.: शष्भ्द्रिशः सवितुर्दैव्यस्योपरस्थे विश्वं भुवनानि तरस्थुः.. (५)

The divine chariot of the Sun, with its shining wheels and golden yoke, carries all the worlds, resting upon its celestial expanse.

जिनके पैर सफेद हैं, वे हिरण्य (स्वर्ण) के पहियों वाले रथ को ले जाते हैं। हे सविता! आपके ऊपर स्थित होकर, विश्व के सभी भुवन (लोक) तरस्थुः (पार करते हैं)। (५)

Mandala 1 · Verse 6
तिस्रो द्यावः सवितुर्दृशां उपस्थां एका यमस्य भुवने विराषट्. आणिं न रथ्यमृताधि तरस्थुरिह ब्रवीतु य उ तच्चिकेतत्.. (६)

The three heavens, visible to the Sun, and the one realm of Yama, are vast. Let him who knows this speak of the chariot wheel that rolls through the cosmic order.

सविता की दृष्टि से तीन द्युलोक (स्वर्ग, मध्यलोक, पाताल) उपस्थ (पास) हैं, और एक यमलोक में विराषट् (विराजमान) है। जो इसे जानता है, वह कहे कि रथ के पहियों के समान ये तीन लोक और यमलोक भी अमृत को पार करते हैं। (६)

Mandala 1 · Verse 1
प्र वो यहं पुरुषणां विशां देवयतीनाम्. अग्निं सूक्तभिरर्चोभिरिमेहं यं सीमिदन् यईळते.. (१)

I praise with hymns and praises the divine Agni, the best among men, who is worshipped by the devout.

देवानां कामनं कुरुवन्तः प्रजानां परं अनुग्रहं निमित्तं सूकरूपी वचनो द्वारा महान् अग्नि की प्रार्थना करते हैं. अन्य ऋषिगण भी इसी अग्नि की स्तुति करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
जनासोऽग्ने दधिरं सहोवृधं हविष्मन्तो विमेध ते. स त्वं नो अद्य सुमना इहाविता भवा वाजेषु सन्तु.. (२)

O Agni, those who offer oblations to you, the giver of strength, are filled with your power. May you, well-disposed, protect us today, and may our offerings be abundant.

यज्ञ करने वाले लोगों ने शक्तिवर्धक अग्नि को धारण किया था. हे अग्नि! हम लोग हवि लेकर तुम्हारी सेवा करते हैं. तुम अन्नदान में तत्पर हो. आज इस यज्ञ में हम पर परम प्रसन्न होकर हमारे रक्षक बनो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
प्र त्वा दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्. महस्ते सतो वि चचन्त्यर्चयो दिवि स्पृशन्ति भानवः.. (३)

We choose You, O Messenger, the Invoker, the All-Knowing. Your greatness is revealed by Your radiant splendors, which reach the heavens.

हे अग्नि! तुम यज्ञ के होता एवं सर्वज्ञ हो. हम तुम्हें देवों का दूत समझकर वरण करते हैं. तुम महान् और नित्य हो. तुम्हारी चमक बढ़ती है. तुम्हारी किरणें आकाश को छूती हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
देवासस्त्वा वरुणो मित्रो अर्यमा सं दूतां प्रत्यन्विमन्थे. विश्वं सो अग्ने जयति त्वया धनं यस्तै द्वादश मर्त्यः.. (४)

Agni, with you as our messenger, Varuna, Mitra, and Aryama, the gods, will surely conquer all wealth for the mortal who possesses you.

हे अग्नि! वरुण, मित्र और अर्यमा—ये तीनों देव तुम्हें अपना प्राचीन दूत समझकर भली प्रकार चमकाते हैं. जो यजमान तुम्हें हवि देता है, वह तुम्हारे द्वारा सभी प्रकार की संपत्ति जीत लेता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
मन्द्रो होता गृहपतिरग्ने दूतं विश्वामसि. त्वे विश्वा संगतानि व्रता ध्रुवा यानि देवा अकृण्वत.. (५)

The priest, the householder, Agni, you are the messenger of all. In you are gathered all the firm vows that the gods have made.

हे अग्नि! तुम देवों को बुलाने वाले, यजमान रूप प्रजाओं के पालक एवं हर्षित करने वाले हो. तुम देवताओं के दूत हो. पृथ्वी आदि देवता जो स्थिर कर्म करते हैं, वे तुम में मिल जाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वे इदग्ने सुभगे यविष्ठ्य विश्वमा हवते हविः. स त्वं नो अद्य सुमना उतापरं यक्षं देवान्सुवीर्या.. (६)

O Agni, most youthful and auspicious, accept this offering, for all the gods are invoked by it. May you, with a benevolent mind, grant us strength and prosperity.

हे युवक अग्नि! तुझ परम् सौभाग्यशाली को लक्ष्य करके सब हव्य दिए जाते हैं. तुम प्रसन्न मन होकर आज, कल और सर्वदा सुंदर एवं शक्तिशाली देवों का यज्ञ करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
तं घमिश्था नमस्विन् उप स्वराजमास्ते. होत्राभिरग्निं मनुष्यः समिन्धते तितिवर्वा सो अति सिधः.. (७)

The one who is honored and worships, reigns supreme. By offerings, humans ignite the divine fire, which is the powerful and victorious protector.

यजमानं नमस्कारं कृते हुए अपने आप चमकने वाले उसी अग्नि को हवि देकर उपासना करते हैं. शत्रु को करारी हार देने के इच्छुक लोग होताओं द्वारा अग्नि को प्रज्वलित करते हैं.(७)

Mandala 1 · Verse 8
घ्नन्तो वृत्रतरन्नोदसी अप उरु क्षयाय चक्रिरे. भुवत्कण्वे वृषा घुम्न्याहुतः क्रन्ददृशो गविष्ठि.. (८)

They, the destroyers of obstacles, made vast space for dwelling. The powerful one, invoked by praise, became manifest in the cows' pasture.

हे अग्नि! तुम्हारी सहायता से देवों ने वृत्र को मारकर रहने के लिए स्वर्ग, पृथ्वी और आकाश को विस्तृत किया. जिस प्रकार संग्राम में हिन् हिनाता हुआ घोड़ाएं प्राप्त करता है, उसी प्रकार भली प्रकार बुलाए जाने पर तुम कण्व ऋषि के लिए इच्छानुसार धन बरसाओ. (८)

Mandala 1 · Verse 9
सं सीदस्व महों असि शोचस्व देववीतमः. वि धूममग्ने अरुष्ं मियेध्य सृज प्रशस्तं दर्शतम.. (९)

O Agni, radiant and most divine, settle yourself and blaze forth with purifying smoke. Shine forth, O worthy one, with your brilliant, visible light.

हे अग्नि! तुम भली प्रकार बैठो. तुम महान् हो. तुम देवताओं की प्रबल इच्छा करते हुए जलो. हे बुद्धिमान् एवं प्रशंसनीय अग्नि! तुम इधर-उधर फैलने वाले धुएं को विशेष रूप से बनाओ.(९)

Mandala 1 · Verse 10
यं त्वा देवासो मनवे दधुरिह यजिष्ठं हव्यवाहन. यं कण्वो मध्यातिथिनंस्पृत्ं यं वृषा यमुपस्तुत:.. (१०)

O bearer of oblations, whom the gods have established for man as the most worshipful, whom Kanva has praised, whom the strong and the lauded have invoked.

हे हव्यवाहक अग्नि! समस्त देवों ने मनु के लिए इस यज्ञस्थल में तुझ परम पूज्य अग्नि को धारण किया था. कण्व ने पूज्य अतिथियों के साथ धन द्वारा प्रसन्न करने वाले तुझ अग्नि को धारण किया था. वर्षा करने वाले इंद्र एवं अन्य स्तुतिकर्ताओं ने भी तुम्हें धारण किया था. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
यमग्निं मेध्यातिथः कण्व ईधं ऋतादाधि. तस्य प्रे ो दीद्युस्तमिमा ऋचस्तमग्निं वर्धयामस.. (११)

We praise this Agni, kindled by the Rishis from Truth, whose brilliance shines forth, and to whom these hymns are sung.

पूज्य अतिथियों वाले कण्व ने जिस अग्नि को सूर्य से लेकर प्रज्वलित किया था, उसी अग्नि की फैलने वाली किरणें चमक रही हैं. हमारी ये ऋचाएं तथा हम उसी अग्नि को बढ़ाते हैं.(११)

Mandala 1 · Verse 12
रायस्पृधं स्वधावोऽस्ति हि तेऽग्ने देवेषुयम्. त्वं वाजस्य श्रुत्यस्य राजसि स नो मूळ महों असि.. (१२)

O Agni, you are the wealth-possessor, the lord of sustenance, and the king of abundant food. You are our strength and our great protector.

हे अन्न सहित अग्नि! हमें धन दो. तुम्हारी देवों से मित्रता है, तुम प्रसिद्ध अन्न के स्वामी एवं महान् हो. तुम हमें सुखी बनाओ.(१२)

Mandala 1 · Verse 13
ऊर्ध्व ऊ षण ऊतये तिष्ठा देवो न सविता. ऊर्ध्वो वाजस्य संनिता यदञ्जिभिर्र्विद्धयामह.. (१३)

May the divine Sun, the bestower of life, stand radiant for our upliftment. May he, the gatherer of sustenance, be with us as we are invigorated by his light.

हे सविता देव! तुम ऊपर की ओर उठो। तुम वाज (अन्न) के दाता हो, हम तुम्हें स्तुतियों से प्राप्त करते हैं।

Mandala 1 · Verse 14
ऊर्ध्वो नः पाहांहसो नि केतुना विश्वं समत्रिणो दह. कृधी न ऊर्ध्वाञ्चरथाय जीवसे विदा देवेषु नो दुवः.. (१४)

May our strength be uplifted by your banner, consuming all our sins. Grant us the ability to live a life of purpose and service, recognized by the divine.

हे अग्नि! तुम हमारे पापों को अपने प्रकाश से भस्म कर दो। हमें ऊपर की ओर ले चलो, जिससे हम देवताओं के बीच में सुखपूर्वक रहें।

Mandala 1 · Verse 15
पाहि नो अग्ने रक्षसः पाहि धू र्त्तैररा.. पाहि रिषत उत वा जिघांसतो बृहद्रणो यविष्ठ्य.. (१५)

O Agni, protect us from demons and from the deceitful. Protect us from those who wish to harm or kill us, O most youthful and mighty one.

हे अग्नि! तुम दुष्ट राक्षसों से हमारी रक्षा करो। हे यविष्ठ (युवा) अग्नि! तुम उन लोगों से हमारी रक्षा करो जो हमें मारना चाहते हैं।

Mandala 1 · Verse 16
धनेव विश्वेि जहारणणस्पुर्जभं यो असभ्भुक. यो मर्त्यः शिश्तिे अत्यकुभिर्मार्गः स रिपुरीशत.. (१६)

He who, through attachment to wealth, seizes the wealth of the world, and he who, being mortal, follows a path of greed, becomes the enemy of all.

हे अग्नि! तुम समस्त शत्रुओं को भस्म कर दो, जो हमें हानि पहुँचाना चाहते हैं। हे मर्त्य (मनुष्य)! जो तुम्हें नहीं पूजता, वह शत्रु के समान है।

Mandala 1 · Verse 17
अग्निर्वनं सुवीर्यमग्निः कण्वाय सौभगम्. अग्निः प्रावन्निन्नो मेध्यातिथिमग्निः साता उपस्तृतम्.. (१७)

Agni, the fire, grants strength to the forest and prosperity to Kanva. Agni protects the sacrificer, Medhyatithi, and sustains the offerings.

हे अग्नि! तुम कण्व को सौभाग्य प्रदान करो। हे अग्नि! तुम मेध्यातिथि नामक ऋषि की रक्षा करो। हे अग्नि! तुम सब के लिए उपस्थित हो।

Mandala 1 · Verse 18
अग्निना तुर्वशं यदुं परावत उग्रादेव ह्वामहे. अग्निर्नयन्वावस्वं बृहद्रथं तुवीतिं दस्यवे सहः.. (१८)

By Agni, we invoke Turvasha and Yadu from afar, and Ugra. Agni leads the wealthy Brihadaratha and Tuviti against the Dasyu.

हे अग्नि! तुम तुर्वश, यदु, उग्रादेव, बृहद्रथ और तुवीति नामक ऋषियों को देवताओं के पास ले चलो।

Mandala 1 · Verse 19
नि त्वामग्ने मनुर्दधे ज्योतिर्जनाय शश्रुते। दीदेध कण्व ऋतजां उक्षितो यं नमस्यन्ति कृष्टयः॥ (१९)

Agni, the light for humanity, was placed by Manu. The radiant, truth-born Agni, whom all people worship, shines forth.

हे प्रकाशरूप अग्नि! मनु ने समस्त जातियों के कल्याण के लिए तुम्हारी स्थापना की थी। हे अग्नि देव! तुमने यज्ञ के निमित्त उत्पन्न होकर हव्य से तृप्ति प्राप्त की और कण्व को प्रकाश दिया। मनुष्य तुम्हें नमस्कार करते हैं। (१९)

Mandala 1 · Verse 20
त्वेषासो अग्नेरभवन्तो अर्च्यो भीमासो न प्रतीत्ये। रक्षस्विन्: सदमिधातुमावतो विश्वं समत्रिणो दह.. (२०)

O Agni, your blazing flames become fierce and awe-inspiring, consuming all evil and darkness. You protect us, burning away all that is unholy.

अग्नि की ज्वालाएं चमकीली, शक्तिशाली और भयानक हैं। इसलिए उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता। हे अग्नि देव! राक्षसों, यतुधानों एवं हमारे विश्व भक्षक शत्रुओं को जलाओ। (२०)

Mandala 1 · Verse 21
tad viprāso vipanyavo jāgṛvāṁsaḥ sam indhate | viṣṇor yat paramam padam

Mandala 1 · Verse 1
क्रीळ्ढं वः: शार्धां मारुतमनवर्णं रयेशुभम्. कण्वा अभि प्र गायत.. (१)

Sing forth, O Kanvas, praising the swift, divine Maruts, who are like lions and possess auspicious speed.

हे कण्व गोत्रोत्पन्न ऋषियो! विहरणशील एवं शत्रुरहित मरुतों को लक्ष्य करके स्तुति करो. वे अपने रथ पर सुशोभित होते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ये पृष्तीभिरन्त्रिभिरिभिः साकं वाशीभिरिञ्जिभिः. अजयन्त स्वभानवः.. (२)

The self-radiant ones conquered with their sharp, swift, and shining weapons.

बिंदुयुक्त हरिणियां मरुतों का वाहन हैं. उन्होंने इन वाहनों के साथ प्रकाशवान् होकर घोर गर्जन, आयुधसमूह तथा अलंकारों सहित जलग्रहण किया. (२)

Mandala 1 · Verse 3
इहेव शृण्व एषां कशा हस्तेषु यद्धान्. नि यामञ्जिचमूज्ज्ते.. (३)

Hearkening here, the whips in their hands lash out, driving the chariot.

मरुतों के हाथ में रहने वाले चाबुक का शब्द हम सुन रहे हैं. चाबुक का वह शब्द युद्ध में हमारी शक्ति बढ़ाता है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
प्र वः: शार्धं घृष्ये त्वेष्ुघ्म्नाय शुष्मिणे. देवतं ब्रह्म गायत.. (४)

Sing to the divine Brahman, the powerful and radiant, who is worthy of praise and adoration.

हे ऋत्विजो! तुम्हारे बल का समर्थन करने वाले, शत्रु दमनकारी, उज्जवलकीर्तिसंपन्न एवं शक्तिशाली मरुतों की स्तुति हवि ग्रहण के उद्देश्य से करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
प्र शंसा गोष्वच्यं क्रीळं यच्छर्धां मारुतम्. जम्भे रसस्य वावृधे.. (५)

Praise the cows, the playful, the giver of strength, the wind. The essence of the earth has grown in the jaws.

हे ऋत्विजो! दूध देने वाली गायों के बीच स्थित मरुदगणों के अविनाशी, विहर्षशील एवं सहन करने योग्य तेज की प्रशंसा करो. वह तेज गाय का दूध पीने के कारण बढ़ा है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
को वो वर्षिष्ठ आ नरो दिवश्व गभ्भ् धूतयः यत्सीम्न्तं न धुनुथ.. (६)

O heroes, who among you is the greatest, who has come from the sky, who shakes the very foundations of the earth?

हे वायुओ! तुम इतने बलवान हो कि तुम सब को हिलाते हो, तुम सब को क्यों नहीं हिलाते हो? (६)

Mandala 1 · Verse 7
नि वो यामाय मनुष्यो द्रघ उग्राय मन्यवे. जिहीत पर्वतो गिरिः.. (७)

The mountain, the great peak, bows down to the powerful, fierce spirit that moves us.

हे मरुद्गणो! तुम्हारे चलने से घर गिर पड़ेगा, इस भय से लोगों ने घरों में मजबूत खंभे गाड़े हैं. तुम्हारी चाल उग्र एवं झकझोरने वाली है. तुम्हारी तेज चाल से चोटियों वाले अनेक पर्वत हिल जाते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
येषामेष्मेषु पृथिवी जुजुर्वी इव विषपतिः भिया यामेषु रेजते.. (८)

The Earth, like a queen, trembles in fear within His realms.

हे मरुद्गणो! तुम्हारी चाल सभी पदार्थों को दूर फेंक देती है. वृद्ध एवं दुर्बल राजा शत्रु के भय से जिस प्रकार कांपता है, उसी प्रकार तुम्हारे चलने से धरती कांपती है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
स्थिरं हि जानमेषां वयो मातुनिंरतेव. यत्सीम्नुं द्रिता शवः.. (९)

Their strength is steady, like the mother's milk that nourishes, for their might is swift and unhindered.

मरुतों की उत्पत्ति का स्थान आकाश स्थिर रहता है. आकाश मरुतों की माता के समान है. आकाश में होकर पक्षी निकल सकते हैं. मरुतों का बल धरती और आकाश को पृथक् करता है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
उदु त्वे सूनवो गिरः काष्ठा अजमेष्वत्लन्त. वाश्र्ा अभिजु यातवे.. (१०)

The radiant rays of the sun ascend, like lambs, to the heavens, urging us to move forward.

शब्दों के जन्मदाता मरुद्गण चलते समय जल का विस्तार करते हैं और रंभाती हुई गायों को घुटने तक गहरे जल में प्रवेश करने को प्रेरित करते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
त्यं चिद्ध्वा दीर्घं पृथिं मिहो नपातम्म्धम्. प्रच्यावयन्ति याभिः.. (११)

They who, with great effort, churn the earth, are carried along by the forces they unleash.

मरुद्गण अपनी तेज चाल से विस्तृत, मोटे, जल न बरसाने वाले, अपराजयेय एवं प्रसिद्ध बादलों को भी कंपित कर देते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
मरुतो यद्ध वो बल जनाँ अच्युवीवतन. गिरीं रचुव्यवीतन.. (१२)

When the Maruts, with their strength, struck the people, they also struck the mountains.

हे मरुतो! तुम शक्तिशाली हो, इसलिए समस्त प्राणियों को अपने-अपने काम में लगाते हो तथा मेघों को भी प्रेरित करते हो. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
यद्ध यान्ति मरुतः सं ह ब्रुवतेऽश्वन्ना. शृणोति कश्चिदेषाम्.. (१३)

When the winds blow, they speak together, but no one hears their words.

मरुद्गण जब चलते हैं तो मार्ग में सब ओर ध्वनि अवश्य करते हैं. उस ध्वनि को चाहे जो सुन सकता है. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
प्र यात् शीभमाशुभिः सन्ति कण्वेषु वो दुवः । तन्त्रो ष्ा मादयेधैः ।। (१४)

May the swift ones, with their speed, bring forth abundance for the wise. Let them not be agitated by the intoxicating draughts.

हे मरुद्गणो! अपने तीव्रगामी वाहन के द्वारा यज्ञभूमि में शीघ्र आओ। बुद्धिमान यजमानों के द्वारा की गई सेवा से उनके प्रति तृप्त बनो। (१४)

Mandala 1 · Verse 15
अस्ति हि ष्ा मदाय वः । स्मसि ष्ा वयेमषाम् । विश्वं चिदायुर्जीवसे ।। (१५)

May this knowledge be for your intoxication and remembrance, so that you may live this entire life.

हे मरुद्गणो! हमारे द्वारा दिया हुआ हवि तुम्हें तृप्त करने के लिए है। हम पूर्ण आयु जीने के लिए तुम्हारे सेवक बने हैं। (१५)

Mandala 1 · Verse 16
ambayo yanty adhvabhir jāmayo adhvarīyatām | pṛñcatīr madhunā payaḥ

Mandala 1 · Verse 17
amūr yā upa sūrye yābhir vā sūryaḥ saha | tā no hinvantv adhvaram

Mandala 1 · Verse 18
apo devīr upa hvaye yatra gāvaḥ pibanti naḥ | sindhubhyaḥ kartvaṁ haviḥ

Mandala 1 · Verse 19
apsv a1ntar amṛtam apsu bheṣajam apām uta praśastaye | devā bhavata vājinaḥ

Mandala 1 · Verse 20
apsu me somo abravīd antar viśvāni bheṣajā | agniṁ ca viśvaśambhuvam āpaś ca viśvabheṣajīḥ

Mandala 1 · Verse 21
āpaḥ pṛṇīta bheṣajaṁ varūthaṁ tanve3 mama | jyok ca sūryaṁ dṛśe

Mandala 1 · Verse 22
idam āpaḥ pra vahata yat kiṁ ca duritam mayi | yad vāham abhidudroha yad vā śepa utānṛtam

Mandala 1 · Verse 23
āpo adyānv acāriṣaṁ rasena sam agasmahi | payasvān agna ā gahi tam mā saṁ sṛja varcasā

Mandala 1 · Verse 24
sam māgne varcasā sṛja sam prajayā sam āyuṣā | vidyur me asya devā indro vidyāt saha ṛṣibhiḥ

Mandala 1 · Verse 1
कद्ध नूनं कथप्रियः पिता पुत्रं न हस्तयोः । दधिध्वे वृकबर्हिषः ।। (१)

Why does the father, who loves to tell stories, not hold his son in his hands? You have been given the strength of the wolf.

हे मरुद्गणो! प्रार्थना चाहने वाले तुम लोगों के लिए कुश बिछा दिए गए हैं. जिस प्रकार पिता पुत्र को हाथों पर धारण करता है, क्या तुम भी हमें उसी प्रकार धारण करोगे? (१)

Mandala 1 · Verse 2
क्व नूनं कद्धो अर्थ गन्ता दिवो न पृथिव्याः । क्व वो गावो न रण्यन्ति ।। (२)

Where indeed is the meaning that departs from heaven and earth? Where are your cows that do not roam?

हे मरुद्गणो! इस समय तुम कहां हो? तुम इस यज्ञ में कब आओगे? तुम यहां आकाश से आओ, धरती से मत आना. जिस प्रकार गाएं रंभाती हैं, उसी प्रकार यजमान तुम्हें यहां बुलाते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
क्व वः सुम्ना नष्यासि मरुतः । क्व सुविता । क्वोऽविश्रानि सौभगा ।। (३)

Where are your blessings, O Maruts? Where is your favor? Where is my prosperity?

हे मरुद्गणो! तुम्हारी प्रजा पशुरूपी नवीन धन, मणि, मुक्ता आदि रूपी सौभाग्य धन और गज, अश्व आदि रूपी सौभाग्य धन कहां है? (३)

Mandala 1 · Verse 4
यद्यप्यं ष्भिमातरो मतसः । स्यातन । स्तोता वो अमृतः स्यात् ।। (४)

Even if you are born from a mother, you can still become immortal through devotion.

हे ष्षि नामक धेनु के पुत्र मरुद्गण! यद्यपि तुम मरणधर्मा हो, पर तुम्हारी स्तुति करने वाला अमर होगा. (४)

Mandala 1 · Verse 5
मा वो मृगो न यवसे जरिता भूदजोष्यः । पथा यमस्य गाडुप ।। (५)

May the unaging singer not be consumed by the wolf like grass; may he reach the path of Yama.

घास के बीच में मृग जिस प्रकार सेवारहित नहीं रहता, अपितु घास खाता है, उसी प्रकार तुम्हारी स्तुति करने वाले तुम्हारी सेवा से कभी शून्य न हों. इस प्रकार वे यमराज के मार्ग पर नहीं जाएंगे. (५)

Mandala 1 · Verse 6
मो ष् ण्ः परापरा निर्ऋतिर्दुहणा वधीत् । पदीष् ष्षया सह ।। (६)

The supreme, the transcendent and immanent, has destroyed the destructive force of death and decay, along with its companions.

हे मरुद्गण! अत्यंत शक्तिशाली पाप की देवी निर्ऋति का कोई विनाश नहीं कर सकता. वह हमारा वध न करे और हमारी तृष्णा के साथ ही समाप्त हो जाए. (६)

Mandala 1 · Verse 7
सत्यं त्वेषा अमवन्तो धन्वञ्छिदा रुद्रायासः. मिहं कृण्वन्त्यवाताम्.. (७)

The truthful ones, the powerful Rudras, pierce through the darkness, bringing forth the dawn.

रुद्र द्वारा पालित, दीप्तिसंपन्न एव बलशाली मरुद्गण मरुस्थल में भी वापुरहित वर्षा करते हैं, यह बात सत्य है. (७)

Mandala 1 · Verse 8
वाश्मेव विद्युन्निमाति वत्स न माता सिभक्ति. यदेषां वृष्टिसर्ज.. (८)

Just as the mother cow nourishes her calf with milk, so the clouds, like a mother, bestow rain upon the earth.

दूध भरे स्तनों वाली रंभाती हुई गाय के समान बिजली गरजती है. गाय जिस तरह बछड़े को चाटती है, उसी प्रकार बिजली मरुद्गणों की सेवा करती है. इसी के फलस्वरूप मरुद्गणों ने वर्षा की है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
दिवा चित्तमः कृणवन्ति पर्जन्यनोदवाहेन. यत्पृथिंवी व्युन्दन्ति.. (९)

The mind, like darkness, is dispelled by the rain of divine grace, which nourishes the earth of our being.

मरुद्गण जल ढोने वाले बादलों की सहायता से दिन में भी अंधेरा कर देते हैं. वे उसी समय धरती को सींचते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अथ स्वानमरुतां विश्वामा सत्रा पार्थिवम्. अरेजन्त् प्र मानुषाः.. (१०)

The divine sounds of the celestial beings and the wind, along with the earthly realm, filled the universe, and all humanity rejoiced.

मरुद्गणों के गरजनें की ध्वनि से धरती पर बने सभी घर एवं उन में रहने वाले मनुष्य कांपने लगते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
मरुतो वीळूपाणिभिश्चित्रा रोधस्वतीरनु. यातेमखिद्रयामाभिः.. (११)

The mighty Maruts, with their strong arms, advance with their swift, unwearying chariots, following the flowing waters.

हे मरुद्गणो! जिस प्रकार विचित्र किनारों वाली नदी बहती है, उसी प्रकार तुम अपने शक्तिशाली हाथों की सहायता से बिना रुके हुए चलते रहो. (११)

Mandala 1 · Verse 12
स्थिरा वः सन्तु नेमयो रथा अभ्वासृ. सुसंस्कृता अभिशवः.. (१२)

May your chariot wheels be firm and well-fitted, and your chariots be well-prepared for the journey.

हे मरुद्गणो! तुम्हारी नेमि, रथ और घोड़े शक्तिशाली हों. तुम्हारी उंगलियां सावधानी से घोड़ों की लगाम पकड़ें. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
अच्छा वदा तना गिरा जराये ब्रह्मणस्पतिम्. अग्निं मित्रं न दर्शत्.. (१३)

Let us praise Brahmanaspati with pure words, as Agni, the friend, is seen.

हे ऋत्विजों! मंत्र के पालक मरुद्गण, अग्नि एवं दर्शनीय मित्र की प्रार्थना के लिए हमारे सामने ऐसे मंत्रों से स्तुति करो जो उन देवताओं का स्वरूप बताने वाले हों. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
मिमीहि श्लोकमास्ये पर्जन्य इव ततन्ः. गाय गायत्रमुखय्यम्.. (१४)

Let this verse be uttered from your mouth, like the spreading of the rain cloud. Sing the Gayatri mantra.

Mandala 1 · Verse 15
ud uttamaṁ varuṇa pāśam asmad avādhamaṁ vi madhyamaṁ śrathāya | athā vayam āditya vrate tavānāgaso aditaye syāma

Mandala 1 · Verse 1
उत्तिष्ठ ब्राह्मणस्पते देवयन्तस्त्वेमेहे। उप प्र यन्तु मरुतः सुदानव इन्द्र प्राशुभ्रवा सचा.. (१)

Arise, O Lord of Brahman, for these devotees are here to worship you. May the generous Maruts approach, and may Indra, swift and powerful, join us.

हे बृहस्पति! हम पर अनुग्रह करने के लिए अपने निवासस्थान से उठो. देवताओं की इच्छा करने वाले हम तुमसे याचना करते हैं. सुंदर दान करने वाले मरुद्गण तुम्हारे समीप जावें. हे इंद्र! तुम बृहस्पति के सोम रस का सेवन करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वामिद्धि सहसस्पुत्र मर्त्य उपब्रूते धने हिते। सुवीर्यं मरूत आ स्वस्यं दधीत यो व आचके.. (२)

O son of Strength, mortals invoke you for wealth and protection. The Maruts, who have sought your strength, possess great valor.

हे परम बल पालक! शत्रुओं के बीच फंसे हुए धन को प्राप्त करने के लिए मनुष्य तुम्हारी ही स्तुति करते हैं. हे मरुद्गणो! धन का इच्छुक जो मनुष्य, बृहस्पति सहित तुम्हारी स्तुति करता है, वह सुंदर अश्व एवं शोभन वीर्य संपत्र धन प्राप्त करता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
प्रैतु ब्राह्मणस्पतिः प्र देवृत्यं सूनृता। अच्छा वीरं नर्यं पङ्क्तिराधसं देवा यजं नयन्तु नः.. (३)

May Brahmanaspati, the lord of prayer, and the truthful, auspicious divine speech lead us to a heroic, strong, and bountiful sacrifice.

हे बृहस्पति एवं प्रिय सत्य रूपा वाग्देवी हमें प्राप्त हों. बृहस्पति आदि देव वीर शत्रुओं को हमसे बहुत दूर ले जावें एवं हमें मानव हितकारी तथा द्रव्यपूर्ण यज्ञों में ले जावें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यो वाघते ददाति सुनरं वसु स धते अक्षिति श्रवः। तस्मा इळां सुवीरामा यजामहे सुप्रतूर्तिंमहेसम्.. (४)

He who gives abundant wealth to the speaker, attains imperishable fame. For him, we worship the nourishing and heroic offering, the most excellent wealth.

जो वाघते कदापि सुनरं वसु स धते अक्षिति श्रवः। तस्मा इळां सुवीरामा यजामहे सुप्रतूर्तिंमहेसम्.. (४)

Mandala 1 · Verse 5
प्र नूनं ब्राह्मणस्पतिर्मन्त्रं वदत्युक्थ्यम्। यस्मिन्नन्द्रो वरुणो मित्रो अर्यमा देवा ओकांसि चक्रिरे.. (५)

Brahmanaspati now speaks the venerable mantra, in which Indra, Varuna, Mitra, and Aryama made their abodes.

प्र नूनं ब्राह्मणस्पतिर्मन्त्रं वदत्युक्थ्यम्। यस्मिन्नन्द्रो वरुणो मित्रो अर्यमा देवा ओकांसि चक्रिरे.. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तमिन्द्रोचेमा विदधेषु शम्भुवं मन्त्रं देवा अनेहसम्। इमां च वाच प्रतिहर्येथा नरो विश्वेद्वामो वो अश्ववत्.. (६)

May Indra, the benevolent, establish this unblemished mantra, and may all you gods, O men, receive this speech, rich as horses.

तमिन्द्रोचेमा विदधेषु शम्भुवं मन्त्रं देवा अनेहसम्। इमां च वाच प्रतिहर्येथा नरो विश्वेद्वामो वो अश्ववत्.. (६)

Mandala 1 · Verse 7
को देवयन्तमश्वं वजनं को वृषभं प्रप दाक्षान्युपस्थिातान्तर्वत्सवक्षयं दधे.. (७)

Who is the divine horse, the vigorous bull, who has brought forth the nourishing sustenance and the flowing milk?

देवों की अभिलाषा करने वाले एवं यज्ञ के निमित्त कुश तोड़ने वाले बृहस्पति के अतिरिक्त कौन देवता आ सकता है? हव्यदाता यजमान ऋत्विजों के साथ भांति-भांति की संपत्तियों से युक्त घर से निकलकर यज्ञस्थल की ओर प्रस्थान कर चुके हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
उप क्षत्रं पृज्जीवतं हन्ति राजभिभ्र्यै चिस्सुक्ष्तिं दधे. नास्य वर्ता न तरुता महाधाने नाभ्रि अस्ति वज्रिणः.. (८)

He who protects the kingdom and its people, and is firm in his resolve, is never defeated by enemies. Such a powerful ruler, like the thunderbolt-wielder, possesses no equal in wealth or strength.

बृहस्पति अपने शरीर में शक्ति का संचय करें. वे वरुण आदि राजाओं के साथ शत्रुओं का नाश करते हैं एवं भयानक युद्ध में भी डटे रहते हैं. वज्रधारी बृहस्पति को प्रभूत घर प्राप्ति के लिए होने वाले बड़े अथवा छोटे युद्ध में प्रेरित या उत्साहहीन करने वाला दूसरा नहीं है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
यं रक्षन्ति प्रचेतसो वरुणो मित्रो अर्यमा. नूचित्य दभ्यते जन:.. (९)

Those protected by the wise Varuna, Mitra, and Aryama are never deceived by anyone.

उत्तम ज्ञान से संपन्न वरुण, मित्र और অর্থনীতির जिसकी रक्षा करते हैं, वह शीघ्र ही सब शत्रुओं को मार डालता है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
सं पूष्पन्नधनस्तिर व्यंहो विमुचो नपात्. सस्त्वा देव प्र ष्प्सुरः.. (१०)

May we be freed from sin by the radiant, all-pervading divine light, which nourishes and protects us.

हे पूषा! हमें मार्ग के पार लगा दो. पाप विघ्नों का कारण है, तुम उसे नष्ट करो. हे जलवर्षक मेघ के पुत्र! हमारे आगे चलो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
यो नः पूष्पन्नो वृको दुःशेव आदिदेशति. अप स्म तं पथो जहि.. (११)

Strike down the one who, like a wolf, harms us with harsh words and evil deeds.

हे पूषा! यदि कोई आक्रमणकारी, धन अपहण करने वाला एवं दुष्ट शत्रु हमें गलत रास्ता दिखाता है तो उसे हमारे मार्ग से हटा दो. (११)

Mandala 1 · Verse 12
अप त्यं परिपन्थिं मुषीवाणं दुरश्रितम्. दूरमधि सुतेरज.. (१२)

Abandon the thief who is a hindrance and a wicked refuge, and go far away from him.

तुम हमारा रास्ता रोकने वाले चोर एवं कुटिल व्यक्ति को हमारे मार्ग से दूर भगा दो. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
त्वं तस्य द्वाविनोऽघशंसस्य कस्य चित्. पदाभि तिष्ठ तपुषम्.. (१३)

You are the two who stand firm in the footsteps of that one, the sinner, the one who has committed evil.

Mandala 1 · Verse 14
शृण्वन्तु स्तोमं मरुतः सुदानवोऽग्निर्जिह्वा ऋतावृधः । पिबतु सोमं वरुणो धृतव्रतोऽश्विभ्यामुसा सजूः.. (१४)

O generous Maruts, hear this hymn, you who are nourished by Agni's tongue. May Varuna, the steadfast vow-keeper, drink Soma, accompanied by the Ushas and the Ashvins.

मरुतगण स्तुति सुनें। सुदान (दानशील) अग्नि अपनी जिह्वा से (सोम) पिये। धृतव्रत (नियम का पालन करने वाले) वरुण, अश्विनीकुमार और उषा अपने साथ सोम का पान करें। (१४)

Mandala 1 · Verse 15
उभा पिबतमश्विनोभा नः शर्म यच्छतम्. अविद्रियाभिरुतिभिः...(१५)

O Ashvins, drink together and grant us protection with your life-giving powers.

हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों सोमरस पियो. इसके पश्चात् तुम अपनी प्रसिद्ध रक्षा द्वारा हमें सुखदान करो. (१५)

Mandala 1 · Verse 16
सं नो राया बृहता विश्वपेशसा मिमिश्वा समिळाभिरा. सं धुम्नेन विश्वतुरोभो महि सं वाजेर्वाजिनिवति.. (१६)

May we be united with the great, all-beautiful King, with His abundant blessings and His all-conquering might, and with His strength in the battle of life.

सं नो राया बृहता विश्वपेशसा मिमिश्वा समिळाभिरा. सं धुम्नेन विश्वतुरोभो महि सं वाजेर्वाजिनिवति.. (१६) हे उषा! हमें प्रभूत एवं अनेक रूप धन एवं गाएं दान करो. हे पूज्य उषा! हमें सब शत्रुओं का नाश करने वाला यश दो. हे अन्न साधन की क्रिया से संपन्न उषा! हमें धन दो.

Mandala 1 · Verse 17
saṁ nu vocāvahai punar yato me madhv ābhṛtam | hoteva kṣadase priyam

Mandala 1 · Verse 18
darśaṁ nu viśvadarśataṁ darśaṁ ratham adhi kṣami | etā juṣata me giraḥ

Mandala 1 · Verse 19
imam me varuṇa śrudhī havam adyā ca mṛḻaya | tvām avasyur ā cake

Mandala 1 · Verse 20
tvaṁ viśvasya medhira divaś ca gmaś ca rājasi | sa yāmani prati śrudhi

Mandala 1 · Verse 21
ud uttamam mumugdhi no vi pāśam madhyamaṁ cṛta | avādhamāni jīvase


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Amaranath Amar


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